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ट्रांसफार्मर हटाने को 10 हजार रिश्वत मांगी, अफसर शिकायत के बाद भी दबाते रहे मामला, मंत्री के सख्ती दिखाने पर जेई चार्जशीट किया

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जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में लोगों की समस्या सुनते मंत्री मूलचंद शर्मा - फोटो : Sonipat
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अफसर किस तरह से कर्मियों को बचाने के लिए जनता की शिकायतों को दबाने में लगे रहते हैं, यह जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में शनिवार को देखने को मिला। जिस शिकायत को अफसरों को देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई और पीड़ित को चक्कर कटाए जाते रहे, उसमें अब मंत्री मूलचंद शर्मा की सख्ती के बाद बिजली निगम के जेई को दोषी मानते हुए चार्जशीट कर दिया गया है। जिसने एक मकान के आगे से ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने के लिए कम राशि का एस्टीमेट बनाकर 10 हजार रुपये रिश्वत के मांगे और वह नहीं देने पर एस्टीमेट कई गुना बढ़ा दिया गया। इसमें अब जेई पर कार्रवाई करते हुए चार्जशीट किया गया है। वहीं बैठक में 11 शिकायतें रखी गईं, जिनमें से केवल एक का निस्तारण हो सका तो अन्य में खानापूर्ति की गई। इनके अलावा बैठक के बाद में मंत्री के सामने 50 से ज्यादा शिकायत आईं और उनके भी निस्तारण के आदेश दिए गए।
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जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक शनिवार को लघु सचिवालय के सभागार में हुई। जहां परिवहन एवं खनन मंत्री मूलचंद शर्मा के अलावा डीसी डॉ अंशज सिंह, एडीसी दिनेश यादव, विधायक मोहनलाल बड़ौली ने पहुंचकर बैठक शुरू कराई। इस बैठक में 11 शिकायतों को रखा गया, जिनमें पांच शिकायतें पुरानी रखी गईं तो उसमें 6 नई शिकायत शामिल की गई थीं। इन सभी शिकायतों पर कार्रवाई देखी गई तो उनमें से अधिकतर को अफसरों ने टरकाने का प्रयास किया था। किसी भी शिकायत का निस्तारण नहीं हो सका था और उनके निस्तारण में अफसरों ने कोई न कोई पेंच फंसा होने की बात कह दी। जिसपर मंत्री मूलचंद शर्मा ने किसी भी तरह से समस्या का समाधान करने के आदेश दिए। वहीं कतलूपुर के अमित की शिकायत में कहा गया था कि उनके घर के गेट के सामने एक ट्रांसफार्मर लगा था, जिसे शिफ्ट कराने के लिए बिजली निगम में संपर्क किया तो उनको एस्टीमेट 26 हजार 134 रुपये बनाकर दिया गया। आरोप है कि उससे दस हजार रुपये की रिश्वत भी मांगी गई, लेकिन जब उसने रिश्वत नहीं दी तो उसकी फाइल कैंसिल कर दी और दोबारा से एस्टीमेट 66 हजार रुपये का बना दिया। जिसके बाद रुपये जमा कराए तो पुराना सामान लगा दिया गया। इस मामले में उसने कई बार बिजली निगम के अधिकारियों के पास शिकायत की, लेकिन उसके मामले को दबा दिया गया था। यह मामला मंत्री के सामने आया तो एक्सईएन जेसी शर्मा ने बताया कि जांच में जेई दोषी मिला है और उसपर लगे सभी आरोप में उसे चार्जशीट कर दिया गया है। जिसमें कष्ट निवारण समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि इस तरह से केवल एक जेई पर पूरा मामला डाला जा रहा है, जबकि इसमें अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आई है और उनपर भी कार्रवाई होनी चाहिए। जिसमें मंत्री ने अधिकारियों को इस तरह का मामला दोबारा आने पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
प्लॉटों पर नहीं मिला कब्जा, मंत्री भड़के तो अफसर बोले एक सप्ताह में दिलाएंगे
रामनगर के रामकिशन ने मंत्री को बताया कि 1994 में एससी-बीसी को 100 वर्ग गज के प्लाट मिले थे और उस समय सरपंच ने उनकी रजिस्ट्री कराई थी। जिसके बाद सरपंच का देहांत हो गया था और उनको प्लॉटों पर कब्जा नहीं मिल सका। आरोप है कि वह कब्जे के लिए चक्कर काट रहे हैं और उनसे तहसील कर्मी 2-2 हजार रुपये की रिश्वत मांगते हैं। जिसपर अफसरों ने पिछली मीटिंग में जल्द ही कब्जा दिलाने की बात कही थी। उसके बावजूद कब्जा अभी तक नहीं मिला तो मंत्री ने तहसीलदार पर नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि एक सप्ताह में कब्जे मिल जाने चाहिए। जिसपर तहसीलदार ने कहा कि एक सप्ताह में कब्जा दिला दिया जाएगा।
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दूषित पानी की निकासी व पेयजल की समस्या लेकर भी पहुंचे
कष्ट निवारण समिति की मीटिंग में मंत्री मूलचंद शर्मा के सामने माजरी के सुंदर सिंह ने दूषित पानी की निकासी नहीं होने की समस्या रखी तो फरमाणा के रामकरण की पानी पीने योग्य नहीं आने की शिकायत रखी गई। कामी में अवैध कब्जे हटवाने के साथ ही सरपंच पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने का मामला रखा गया, जिसमें सरपंच के खिलाफ जांच जल्द ही पूरी होने पर कार्रवाई की बात कही गई। सरपंच को कई मामलों में दोषी बताया गया है। जुआं में पंचायती कुएं पर कब्जा करने के अलावा सिद्धार्थ कॉलोनी में पेयजल, सीवर, गली टूटी होने की समस्या रखी गई। ऋषिनगर के अंदर भी पेयजल की समस्या होने की बात मंत्री को बताई गई। जिनका जल्द ही समाधान करने के आदेश दिए गए।
कष्ट निवारण समिति की मीटिंग से उठ रहा विश्वास, नहीं पहुंच रहे शिकायत कर्ता
जिला परिवाद एंव कष्ट निवारण समिति की मीटिंग में शिकायत आने के बावजूद भी लोगों को चक्कर कटाए जाते हैं, उससे लोगों का कष्ट निवारण समिति की मीटिंग से विश्वास उठने लगा है। यही कारण है कि शिकायत करने वाले अब मीटिंग में नहीं पहुंच रहे हैं। यहां शनिवार को हुई मीटिंग से ऐसे ही चार शिकायत कर्ता गायब रहे। करेवड़ी के अशोक कुमार ने ड्रेन की समस्या को लेकर शिकायत दी, लेकिन वह नहीं पहुंचा। फरमाणा के रामकरण ने पानी की समस्या को लेकर शिकायत दी, लेकिन वह नहीं पहुंचे। कतलुपुर के अमित की भ्रष्टाचार की शिकायत में कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन वह मीटिंग में नहीं पहुंचा। नोएडा के नवीन चंद्र दुबे ने बिल्डर के खिलाफ शिकायत दी, लेकिन वह नहीं पहुंचा।
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