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Sonipat News: जैन संत गच्छाधिपति प्रकाश चंद महाराज का देवलोकगमन, अंतिम दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

Fri, 08 Aug 2025 02:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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फोटो 18- सोनीपत के गोहाना के गांव वजीरपुरा स्थित टीपीएस स्कूल में जैन संत गच्छाधिपति प्रकाश चंद
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गोहाना। जैन धर्म के प्रमुख संत गच्छाधिपति प्रकाश चंद महाराज का देवलोकगमन होने पर वीरवार को गांव वजीरपुरा स्थित टीपीएस स्कूल परिसर में गमगीन माहौल में अंत्येष्टि की गई। उनके अंतिम दर्शन के लिए काफी अनुयायी व श्रद्धालु उमड़े। अनुयायियों ने शहर में उनके पार्थिव शरीर की पुष्प वर्षा के साथ अंतिम यात्रा निकाली। यात्रा में दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु शामिल हुए।
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जैन संत के अंतिम दर्शन के लिए सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली, मेयर राजीव जैन सहित कई सामाजिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, विभिन्न प्रदेशों से अनुयायी पहुंचे। शहरभर में करीब 7 घंटे तक निकाली गई जैन संत की अंतिम यात्रा में अनुयायी शामिल रहे।
जैन संत प्रकाश चंद महाराज 9.5 वर्ष की लंबी संलेखना (स्वेच्छा से अन्न-जल का त्याग) के बाद मंगलवार शाम को ब्रह्मलीन हो गए थे। उन्होंने इतनी लंबी संलेखना में जीने का रिकाॅर्ड बनाया। महाराज गोहाना के टीपीएस स्कूल में प्रवास कर रहे थे, वहीं अंतिम सांस ली। बुधवार को उनके पार्थिव शरीर को स्कूल परिसर में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया था।
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वीरवार सुबह 10 बजे स्कूल से गच्छाधिपति प्रकाश चंद महाराज की अंतिम यात्रा प्रारंभ की गई। जिस वाहन में जैन संत का पार्थिव शरीर रखा था, उसे हरियाणा पुलिस के जवानों ने खींचा। यात्रा मोर चौक से बाइपास होते हुए जींद रोड पर पहुंची। इसके बाद जींद रोड फ्लाईओवर से पुराना बस अड्डा, समता चौक होते हुए बरोदा रोड पहुंची। यात्रा शाम करीब 5 बजे वापस टीपीएस स्कूल परिसर में पहुंची, जहां संत के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया।
गांव रिंढ़ाना में हुआ था प्रकाश चंद का जन्म
प्रकाश चंद महाराज का जन्म 1 जनवरी 1929 को गोहाना के गांव रिंढ़ाणा में हुआ था। उनके पिता संथारा साधक बद्री प्रसाद, छोटे भाई भगवनश्री रामप्रसाद ने भी संलेखना व संथारा के माध्यम से अपनी देह का स्वेच्छा से त्याग किया था। प्रकाश चंद महाराज ने 9.5 वर्ष तक संलेखना की। उनकी यात्रा में शेर-ए-हिंद सुंदर मुनि के साथ सुशील मुनि व संयति मुनि का सानिध्य रहा।
हेलीकाॅप्टर से पुष्प वर्षा का किया था प्रबंध
जैन श्रद्धालुओं ने महाराज की अंत्येष्टि के समय हेलीकाॅप्टर से पुष्प वर्षा करने की अनुमति ली थी। प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद तैयारी भी की गई, लेकिन अंतिम यात्रा में समय अधिक होने के चलते जैन संत की अंत्येष्टि के समय हेलीकाॅप्टर से पुष्प वर्षा नहीं हो पाई।

जैन संत गच्छाधिपति प्रकाश चंद महाराज चिरकाल तक सभी की स्मृति में रहेंगे। गुरुदेव के देवलोकगमन से संत समाज ही नहीं, अपितु देश-विदेश में बसे श्रद्धालुओं में भारी पीड़ा है। उनका जीवन व समर्पण हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ राष्ट्र व समाज को मजबूती देने का विश्वास देता रहेगा।

- डॉ. अरविंद शर्मा, सहकारिता मंत्री

गुरुदेव के देवलोकगमन से समाज ने एक अलौकिक आध्यात्मिक प्रकाश को खो दिया। गुरुदेव प्रेम, अहिंसा व सद्भाव के प्रचारक थे। उनका सादा जीवन व दिव्य विचारधारा समाज के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
- मोहनलाल बड़ौली, प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा

फोटो 18- सोनीपत के गोहाना के गांव वजीरपुरा स्थित टीपीएस स्कूल में जैन संत गच्छाधिपति प्रकाश चंद

फोटो 18- सोनीपत के गोहाना के गांव वजीरपुरा स्थित टीपीएस स्कूल में जैन संत गच्छाधिपति प्रकाश चंद

फोटो 18- सोनीपत के गोहाना के गांव वजीरपुरा स्थित टीपीएस स्कूल में जैन संत गच्छाधिपति प्रकाश चंद

फोटो 18- सोनीपत के गोहाना के गांव वजीरपुरा स्थित टीपीएस स्कूल में जैन संत गच्छाधिपति प्रकाश चंद

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