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यमुना में बाढ़ से बचाव को पहल शुरू, डीसी ने किया घाट का दौरा

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यमुना घाट पर अधिकारियों व ग्रामीणों के साथ दौरा करते उपायुक्त ललित सिवाच। संवाद - फोटो : Sonipat
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यमुना में आने वाली बाढ़ से बचाव के लिए पहल शुरू हो गई है। बुधवार को उपायुक्त ललित सिवाच ने बाढ़ प्रबंधों का जायजा लेने के लिए यमुना नदी का दौरा किया। इस दौरान उपायुक्त ने जिले की 41.74 किलोमीटर यमुना के सीमा क्षेत्र में आने वाले सभी 7 घाटों की समय-समय पर जांच करने के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। ताकि बरसात के समय में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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उन्होंने कहा कि किसी घाट पर कहीं मिट्टी का कटाव दिखाई देता है तो वहां तुरंत स्टड का निर्माण करवाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यमुना के बहाव से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गन्नौर खंड के बेगा घाट से गांव दहिसरा की सीमा तक का यमुना नदी का क्षेत्र सोनीपत जिले में आता है, जिसकी लंबाई करीब 41.74 किलोमीटर है। इस क्षेत्र का निरीक्षण करने के उद्देश्य से उपायुक्त ललित सिवाच संबंधित अधिकारियों के साथ बेगा घाट पर पहुंचे। उन्होंने यमुना के बहाव और कटाव को मौके पर ही समझते हुए नई ठोकरों के निर्माण और पुरानी ठोकरों की मरम्मत पर विस्तार से चर्चा की। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि जिले की सीमा में आने वाले सभी 7 घाटों की मरम्मत करने के लिए 80 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया है। जिस पर जल्द ही कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
दौरे के दौरान उनके साथ अतिरिक्त उपायुक्त शांतनु शर्मा, एसडीएम सोनीपत शशि वशुंधरा, एसडीएम गन्नौर सुरेंद्र दून, डीएसपी विरेंद्र सिंह, बीडीपीओ गन्नौर के पद पर कार्यरत प्रशिक्षु एचसीएस अंकिता वर्मा, बीडीपीओ मुरथल के पद पर कार्यरत प्रशिक्षु एचसीएस अमित, डीआरओ मनबीर सिंह, तहसीलदार सोनीपत मनोज कुमार, जिला खनन अधिकारी अशोक, डीएफओ राजेश वत्स, सिविल सर्जन जय किशोर, सिंचाई विभाग से कार्यकारी अभियंता ललित, सिंचाई विभाग के एसडीओ विक्रम सिंह, बेगा के नंबरदार योनेश अली सहित संबंधित सभी अधिकारी मौजूद रहे।
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स्टड बनाने के दिए निर्देश
उपायुक्त ने डीएसपी प्वाइंट के पास एक स्टड बनाने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्टड के निर्माण के लिए तुरंत एस्टीमेट तैयार कर इस पर कार्य शुरू करवाएं। ताकि बारिश के समय किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उपायुक्त ने दौरे के दौरान बेगा, मिमारपुर, मेहंदीपुर, बड़ौली घाट व दहिसरा घाट सहित सभी घाटों की गहनता से जांच की। इस दौरान बाढ़ नियंत्रण कार्यों के लिए उन्होंने गांवों के लोगों से भी बातचीत की।
हर साल बर्बाद हो जाती है सैकड़ों एकड़ फसल
यमुना किनारे बसे गांवों के लोग यमुना क्षेत्र में खेतीबाड़ी करते हैं। बारिश होने पर ताजेवाला हेड से पानी छोड़े जाने पर यमुना का जलस्तर बढ़ जाता है। यमुना में पानी आने के दौरान हर साल किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती है। इस दौरान अगर ठोकरें कमजोर होती हैं तो गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। बारिश के दौरान बाढ़ से बचाव के लिए ही बुधवार को उपायुक्त ने घाटों का दौरा किया और बचाव के लिए किए गए प्रबंधों का जायजा लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने भी उपायुक्त ने वहां की स्थिति से अवगत कराया।
अवैध रूप से बनाए अस्थायी पुल को हटाने की तरफ नहीं किसी का ध्यान
टिकोला के खनन प्वाइंट पर यमुना में अवैध रूप से बनाए गए अस्थायी पुल (कच्चा रास्ता) को हटाने की तरफ किसी अधिकारी का ध्यान नहीं है। सिंचाई विभाग ड्यूटी मजिस्ट्रेट नहीं मिलने की बात कह रहा है। यमुना में कोई भी कार्य करने से पहले सिंचाई विभाग की मंजूरी लेनी होती है, लेकिन एक कंपनी ने विभाग से मंजूरी लिए बिना ही कार्य शुरू कर दिया। कंपनी द्वारा कट्टे लगाकर पाइप दबाने का कार्य शुरू किया तो अधिकारियों को इसका पता चला था। बाद में मामला जब प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में आया तो कंपनी के खिलाफ मुरथल थाना में मुकदमा दर्ज करा दिया था। विभाग ने कच्चे रास्ते को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन प्रक्रिया अभी तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पहले कार्रवाई करने के लिए पुलिस सुरक्षा मांगी, बाद में उपायुक्त से ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने के लिए अनुमति मांगी है।
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