दालें तो ऊंचे लोगों की ऊंची पसंद थी ही अब तो सब्जियों का स्वाद भी किरकिरा होने लगा है। वजह महंगाई। महंगाई इतनी बढ़ गई कि एक माह पहले तक 10 रुपये किलो बिकने वाली तोरी अब 50 रुपये में आती है। खीरे और टमाटर के दामों में भी 25 से 30 रुपए की बढ़ोतरी हो गई है। सब्जियों के दामों में हुई इस वृद्धि ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। आलम ये है कि अधिकतर घरों की महिलाओं ने सब्जीमंडी में ही जाना छोड़ दिया है। सब्जियों के अलावा खाद्य पदार्थों जैसे बेसन, तेल, चीनी आदि के दामों में भी भारी बढ़ोतरी हो गई है। विशेषज्ञों की मानें तो बरसात की वजह से हवाओं के रुख में परिवर्तन हुआ, जिसका सीधा असर सब्जियों के उत्पादन पर पड़ा है। उत्पादन में 70 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ गई है, जिससे सब्जियों के दामों में उछाल आया है।
और बढ़ सकते हैं सब्जियों के दाम
विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले दो माह में सब्जियों के दामों और वृद्धि हो सकती है। बताया जा रहा है कि आने वाले दो माह तक सब्जियों का उत्पादन कम ही रहेगा। इसी वजह से दामों ऊंचे रहेंगे। हालांकि इसके बाद लोकल उत्पादन होना शुरू हो जाएगा, जिसके बाद दामों में कमी आएगी।
क्या कहती हैं गृहिणियां
महंगाई ने बिगाड़ दिया बजट
महंगाई ने रसोई का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। हमलोग मध्यवर्गीय परिवार है इसलिए ज्यादा परेशानी हो रही है। खाने पीने की वस्तुएं तक महंगी हो चुकी हैं, लेकिन सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
संगीता, गृहिणी
रसोई बजट बढ़ने से घर चलाना भी मुश्किल
सब्जियों व खाद्य तेलों में बेतहाशी वृद्धि होने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन वस्तुओं को खरीदना भी मुश्किल हो गया है। लेकिन सब्जियों व खाद्य तेल, दालों की कीमतों पर नियंत्रण करने के लिए कोई विशेष कदम तक नहीं उठाया जा रहा।
नीलम, गृहिणी
सब्जी खाना भी होता है जरूरी
एक तरफ चिकित्सक बीमारियों से बचने के लिए अधिक से अधिक सब्जियों का सेवन करने की बात करते हैं, लेकिन आज आसमान को छू रही सब्जियों की कीमतें लोगों के लिए मुसीबत बन गई हैं। एक माह के अंदर बेतहाशा वृद्धि से रसोई का बजट भी बढ़ गया है।
खजानी देवी, गृहिणी
आसमान को छू रही महंगाई
बेतहाशा वृद्धि से आमदनी अट्ठनी, खर्चा रुपया वाली कहावत आज सही साबित हो रही है। गरीब परिवार होते हुए भी महंगी सब्जी लाने के लाले तक पड़े हुए हैं। बढ़ी हुई कीमतों पर कोई नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
पूनम देवी, गृृहिणी
महंगाई ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, कीमतों पर नियंत्रण बेकाबू
सब्जियों, दालें व खाद्य तेलों की महंगाई ने सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं। कांग्रेस सरकार के लिए इतनी कीमतें नहीं थी, जितनी कीमतें आज आसमान को छू रही हैं। इस पर अंकुश लगाने की दिशा में सरकार को कुछ करना चाहिए।
नारायण शर्मा, प्रधान, किराना एसोसिएशन
महंगाई बढ़ने से मंडी में ग्राहकों की भीड़ है कम
एक महीने के अंतराल में सब्जियों के भाव में दो गुणा वृद्धि हो रही है। ये सब्जियों की कीमतों आम लोगों को नहीं भा रही। यमुना खादर क्षेत्र से आने वाली सब्जियां खत्म हो चुकी है। अब दूसरों राज्यों से सब्जियां मंगाकर बेची जा रही है, लेकिन महंगी सब्जियों को खरीदने के लिए मंडी में लोगों की संख्या कम है।
महिपाल, सब्जी विक्रेता
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दूसरे राज्यों से मंगवाई जाती हैं सब्जियां
खादर क्षेत्र से जब सब्जियां आती थी, तब सब्जियों के दाम बहुत कम थे। अब बेल वाली सब्जियां खादर क्षेत्र में खत्म हो चुकी हैं। पंजाब, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों से सब्जियां मंगवाई जा रही हैं। लेकिन उन सब्जियों के दाम ऊंचे हैं, जिसकी वजह से लोग परेशान है।
इंद्रप्रकाश गुप्ता, सचिव, सब्जीमंडी आढ़ती एसोसिएशन
बरसात की वजह से हवाओं के रुख में परिवर्तन हो गया है। इस वजह से सब्जियों की खेती में 70 प्रतिशत की कमी हो गई है। पैदावार कम होने और डिमांड ज्यादा होने से सब्जियों के दाम में अप्रत्याशित उछाल आया है।
डॉ. देवेंद्र कुहाड़, कृषि विकास अधिकारी
सोनीपत से सब्जियों, खाद्य तेल व दालों के दामों का इनपुट
सब्जियां
फुटकर भाव थोक भाव
वस्तु पहले अब पहले अब
आलू 17-18 20-21 15-16 18-20
प्याज 14-16 20-22 12 14
टमाटर 35 60 25/30 40/50
लोकी 10 25 5 18
बैंगन 20 50 15 35
तोरी 10 50 8 40
खीरा 20 60 10 35
खाद्य तेल/दालें
फुटकर भाव थोक भाव
वस्तु पहले अब पहले अब
बेसन 70 110 65 100
सरसो तेल 80 100 70 90
चीनी 38 40 37 39
आटा 18 22 17 20
चना दाल 70 100 65 95
मलका 60 100 50 82
गगन घी 65 70 63 68
देसी घी 350 400 330 350