एटलस की केवल साइकिल ही मशहूर नहीं हुई, बल्कि एटलस कंपनी ने ऑटो इंडस्ट्री, एक्सरसाइज साइकिल व ई-बाइक बनाकर भी हाथ आजमाया। लेकिन छह साल में तीन बार प्रयोग करने के बाद भी कंपनी को नहीं चलाया जा सका और ऑटो से शुरू हुई कंपनी आज पूरी तरह से बंद है। एटलस के बंद होने से सोनीपत में वर्ष 2003 में सबसे ज्यादा लोगों पर मार पड़ी और यहां एक साल के अंदर ही लगभग आठ हजार लोगों का रोजगार चला गया।
सोनीपत में एटलस साइकिल लिमिटेड की पहली यूनिट शहर में लगाकर साइकिल बनाई जाती थी, जो यहां से देश व विदेश तक पहुंच गई। इसके साथ ही एटलस ने सोनीपत के गांव रसोई में एक नई फैक्टरी 1974 के आसपास लगाई, जिसका उद्घाटन भी उस समय राष्ट्रपति रहे डॉ. फखरुद्दीन ने किया था। इस फैक्टरी को एटलस ऑटो इंडस्ट्रीज के नाम से शुरू किया था, जिसमें एटलस की मोपेड बनाई जाती थी।
एटलस साइकिल में जहां लगभग 7 हजार कर्मचारी काम करते थे, वहीं मोपेड में लगभग एक हजार कर्मचारी कार्यरत थे। यह मोपेड भी दुनियाभर में खूब छाई और यहां से विदेशों में सप्लाई ज्यादा होने लगी। रसोई की फैक्टरी में 1998 में मोपेड का उत्पादन बंद कर दिया गया और वहां एक्सरसाइज साइकिल बनानी शुरू कर दी गई। उस समय तक भी किसी का रोजगार नहीं छीना गया और एक्सरसाइज साइकिल की विदेश में सप्लाई के कारण कंपनी ठीक चलती रही।
इन साइकिलों का उत्पादन 2003 के शुरुआत तक हुआ और उसके बाद फैक्टरी में ई-बाइक बनानी शुरू कर दी गई। यह 2003 का साल ही हर किसी के लिए परेशानी लेकर आया था। क्योंकि एटलस ने अपनी कई यूनिट पुणे में शिफ्ट कर दी थी। जिसका सबसे बड़ा कारण बंटवारा व अपना वर्चस्व कायम करना बताया जाता है। उसी साल लगभग 8 हजार कर्मचारियों का रोजगार छीन लिया गया और फैक्टरियों में उत्पादन बंद कर दिया गया।
सोनीपत की एटलस साइकिल व रसोई की ऑटो फैक्टरी दोनों ही एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट थे और दोनों के बंद होने से प्रदेश के उद्योग को बड़ा झटका लगा।