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हुकमी और ओमप्रकाश के परिवार में 26 साल से चल रही दुष्कमी में अब तक 11 लोगों की हो चुकी है हत्या

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कारागार में हुई हत्या के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था। - फोटो : Sonipat
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बुटाना के दो परिवारों के बीच 10 कनाल जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर 26 साल पहले शुरू हुआ खूनी संघर्ष जगबीर की हत्या के बाद फिर से लोगों के जेहन में आ गया है। दो परिवारों का खूनी संघर्ष अब तक 11 लोगों की जान ले चुका है। इनमें दो वारदात कोर्ट परिसर में हो चुकी है। तीसरी वारदात कारागार परिसर में हो गई।
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गांव बुटाना में हुकमी और ओमप्रकाश के परिवारों में वर्ष 1995 में 10 कनाल जमीन खरीदने को लेकर विवाद हुआ था। ओमप्रकाश के चचेरे भाई से हुकमी के परिवार ने जमीन खरीदी थी। जमीन खरीदने पर ओमप्रकाश व उनके भाई रामफल का परिवार नाराज था। विवाद बढ़ने पर वर्ष 1995 में ओमप्रकाश के बेटे और जगबीर के चचेरे भाई आजाद की हत्या कर दी गई थी। यहीं से दोनों परिवारों में रंजिश शुरू हो गई थी। उसमें हुकमी के बेटे संजय बुटाना और अन्य पर आरोप लगा था। 21 दिसंबर, 1997 को जगबीर के भाई सत्यवान उर्फ बोदा की भी हत्या कर दी गई। इसके बाद ओमप्रकाश व उनके भाई रामफल का परिवार 13 जनवरी, 1998 को गांव बुटाना छोड़कर गांव कांसड़ी में आकर बस गया। वर्ष 2003 में गांव बुटाना के अनिल की हत्या कर दी गई थी, जिसका आरोप संजय बुटाना गैंग पर लगा। संजय को शक था कि अनिल का परिवार ओमप्रकाश के साथ मिला हुआ है। कुछ दिन बाद ही अनिल के चचेरे भाई दलबीर की भी गांव में हत्या कर दी गई थी। वर्ष 2004 में अनिल के भाई काला और चचेरे भाई बलजीत की हत्या कर दी गई। अक्तूबर 2008 में गांव कासंडी में ओमप्रकाश के बेटे फूल कंवार उर्फ बंटा की हत्या क दी गई। इन हत्याओं में संजय और उसके साथियों पर मुकदमा दर्ज हुआ। जिसमें कृष्ण को वर्ष 2012 में उम्रकैद की सजा हुई थी। 12 दिसंबर, 2008 को रामफल के बेटे जगबीर ने संजय बुटाना की सोनीपत के न्यायिक परिसर में हत्या कर दी थी। जिसमें मार्च, 2012 को जगबीर को उम्रकैद की सजा हुई थी। अक्तूबर, 2010 में मृतक बलजीत के बेटे ने अपने साथी के साथ मिलकर संजय के भाई प्रकाश की सोनीपत न्यायिक परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। वर्ष 2011 में बुटाना के प्रदीप की हत्या की गई थी। रविवार को जिला कारागार में जगबीर की हत्या कर दी गई।
न्यायालय परिसर से कारागार तक हुई हत्या
दो गुटों की गैंगवार में न्यायालय परिसर से लेकर जिला कारागार तक हत्या हो चुकी है। 12 दिसंबर, 2008 को जगबीर ने संजय बुटाना की हत्या तत्कालीन एडीजे की कोर्ट के बाहर कर दी थी। कंबल ओढ़कर आए जगबीर ने संजय को कोर्ट परिसर के गेट पर ही गोली मार दी थी। वहीं बाद में संजय के भाई प्रकाश की हत्या भी 19 अक्तूबर, 2010 को सोनीपत कोर्ट परिसर में कर दी गई थी। उसे पुलिस हत्या के मामले में पेशी से वापस कैदी वाहन में बैठाने लेकर आई थी। तभी उसकी हत्या कर दी गई थी। अब जगबीर की हत्या कारागार के अंदर की गई है।
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