सोनीपत। गन्नौर तहसील में करोड़ों की फर्जी रजिस्ट्री करने के आरोप लगने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए नायब तहसीलदार अमित कुमार के खिलाफ कार्रवाई की है। लापरवाही और नियमों की अनदेखी के आरोपों के चलते उन्हें तत्काल प्रभाव से फील्ड ड्यूटी से हटाकर पंचकूला स्थित मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। पूरे प्रकरण की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने 22 जनवरी को वित्त आयुक्त एवं राजस्व विभाग (एफसीआर) को पत्र लिखकर कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इससे पहले इस प्रकरण की जांच अतिरिक्त उपायुक्त को सौंपी गई थी, जिसकी रिपोर्ट में रजिस्ट्री प्रक्रिया में प्राथमिक स्तर पर चूक सामने आई।
वित्त आयुक्त एवं राजस्व विभाग की ओर से जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि विवादित रजिस्ट्री से जुड़े सभी मूल दस्तावेज जांच के दौरान प्रस्तुत करना नायब तहसीलदार के लिए अनिवार्य होगा। जांच का उद्देश्य यह तय करना है कि रजिस्ट्री के समय नियमों, कानूनी प्रक्रियाओं और दस्तावेज सत्यापन के मानकों का पालन किया गया या नहीं।
पुलिस आयुक्त की रिपोर्ट में भी उठे सवाल
विवादित रजिस्ट्री मामले को लेकर पुलिस आयुक्त सोनीपत ने भी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय पत्राचार किया है। पत्र में भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत आपराधिक लापरवाही और नियम उल्लंघन की संभावनाओं की जांच का उल्लेख किया गया है। इससे यह मामला अब केवल विभागीय नहीं, बल्कि आपराधिक जांच के दायरे में भी आ सकता है।
गवाह-नंबरदार और रजिस्ट्री प्रक्रिया की होगी पड़ताल
राजस्व विभाग की जांच में रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया, दस्तावेजों की प्रामाणिकता, गवाहों व नंबरदार की भूमिका, डीड राइटर की जिम्मेदारी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही की विस्तृत जांच की जाएगी। विभाग ने साफ किया है कि यदि जांच में मिलीभगत या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह है पूरा मामला
गन्नौर क्षेत्र में दिल्ली की एक रियल एस्टेट कंपनी की लगभग 4.5 एकड़ जमीन, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है, को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मात्र 6.16 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। आरोप है कि फर्जी विक्रेता ने कंपनी के नाम से नकली अथॉरिटी लेटर तैयार किया। जांच में खरीदार, गवाह, नंबरदार और डीड राइटर से जुड़े दस्तावेजों में भी गंभीर गड़बडि़यां सामने आईं इसके बावजूद रजिस्ट्री कर दी गई। मामला सामने आने के बाद न तो तत्काल रजिस्ट्री रद्द की गई और न ही कार्रवाई हुई, जिससे राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए थे। अब नायब तहसीलदार पर कार्रवाई के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।