गन्नौर। सृष्टि के प्राणियों के लिए धर्म ही माता है और पिता रक्षक है। धर्म हमें सुख, संपत्ति, वैभव व निर्मलता देने वाला है। धर्म ही सर्वोपरि है। धर्म के मार्ग पर चलकर मनुष्य हर कार्य कर सकता है। प्रभु महावीर ने मनुष्य को देवताओं से भी महान कहा है। जब तक हम जीवन की महत्ता नहीं समझेंगे, तब तक मनुष्य जीवन को सार्थक नहीं कर पाएंगे। यह बातें 108 गुप्ति सागर महाराज ने रविवार को जीटी रोड स्थित गुप्ति धाम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में प्रवचन करते हुए कहीं।
गुप्ति सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य धर्म-आराधना, तप तपस्या कर जीवन को मोक्ष मार्ग की ओर ओर ले जा सकता है। भगवान महावीर ने मनुष्य जीवन की जो महत्ता बताई है उसे समझें। जीवन को भोग विलास व परिवार में उलझाने के बजाय आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर करें। भगवान महावीर ने उत्तराध्यन सूत्र में जीवन में विनय का क्या महत्व है, इसकी पूरी बात कही है। अज्ञानता ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। उन्होंने बताया कि मंदिर उपाश्रय, स्थानक व किसी भी धार्मिक स्थान पर जाएं तो वहां अपने मन के भाव शुद्ध रखें। इस मौके पर अमित जैन, विजेश जैन, एससी जैन, अनिल जैन, प्रदीप जैन, अंशुल जैन व राजीव जैन मौजूद रहे।