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भगवान की भक्ति के बिना मानव जीवन नहीं होगा सार्थक : महाराज

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फोटो : सोनीपत के गुड़ मंडी स्थित अग्रवाल धर्मशाला परिसर में श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा सुन
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सोनीपत। गुड़ मंडी स्थित अग्रवाल धर्मशाला में श्री चैतन्य महाप्रभु संकीर्तन मंडल के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा का किया जा रहा है। सोमवार को चौथे दिन श्रील भक्ति प्रसाद विष्णु गोस्वामी महाराज ने राजा अम्बरीश का प्रसंग सुनाया। राम जन्म व कृष्ण जन्म उत्सव मनाया गया। हरिनाम संकीर्तन किया गया।
श्रील भक्ति प्रसाद विष्णु गोस्वामी महाराज ने कहा कि यदि हम भगवान की भक्ति नहीं करते हैं तो यह मनुष्य जन्म सार्थक नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीव का एकमात्र धर्म भगवान श्रीकृष्ण की सेवा करना है।
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पौराणिक कथा के अनुसार परम विष्णु भक्त इक्ष्वाकुवंशीय राजा अंबरीष को क्रोधवश गलत श्राप देने के कारण सुदर्शन चक्र, महर्षि दुर्वासा को मारने के लिए पीछा करने लगे। महर्षि को भगवान विष्णु ने अभयदान के लिए प्रयागराज में संगम तट से एक योजन की दूरी पर भगवान शिव की तपस्या करने के लिए कहा।
महर्षि दुर्वासा ने गंगा तट पर शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव का तप और पूजन किया जिससे उन्हें अभयदान मिला। पौराणिक मान्यता है कि महर्षि की ओर से स्थापित शिवलिंग के पूजन से अभयदान मिलता है।
कथाव्यास की ओर से सुनाई गई प्रभु श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की अमृतमयी कथा ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा के दौरान जैसे ही राम जन्म और कृष्ण जन्म का मंचन हुआ पूरा पंडाल उत्सव में डूब गया। जय श्रीराम और जय श्रीकृष्ण के जयघोष से पंडाल गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने नाच-गाकर जन्मोत्सव मनाया। विशेष रूप से सजे मंच पर प्रस्तुत राम जन्म और कृष्ण जन्म की झांकियां भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं। श्रील भक्तिप्रसाद विष्णु गोस्वामी महाराज ने कहा कि अयोध्या में राजा दशरथ के घर चार पुत्रों का आगमन हुआ।
श्रीराम ने धर्म, नीति और आदर्शों से भरे हुए जीवन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में भी श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। मयार्दा, संयम और सत्य के पथ पर चलकर समाज में फैलते वैमनस्य और कलह को दूर किया जा सकता है।
श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कंस के अत्याचारों से मुक्ति के लिए कृष्ण का जन्म दिव्य संकल्प का प्रतीक है। देवकी-वासुदेव की कोठरी में जन्म लेते ही जैसे वातावरण आनंद से भर गया था उसी तरह आज भी कृष्ण के उपदेश और जीवन चरित्र मानवता को प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण का संदेश कर्म, कर्तव्य और प्रेम आधुनिक समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। पारिवारिक विघटन, अहंकार और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए कृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
इस दौरान प्रवीन गोयल, पुनीत गर्ग, केशव गोयल, प्रदीप गोयल, अशोक गर्ग, आनंद गर्ग, घनश्याम सिंगला, गौरव गर्ग, नरेंद्र गोयल भी उपस्थित रहे।
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