फोटो: 39 : सोनीपत डिपो पर खड़ी बसें। संवाद
सोनीपत। ट्रेन के बाद सफर के लिए मुसाफिर सबसे ज्यादा रोडवेज बसों पर निर्भर हैं। पूरा किराया देने के बाद भी उन्हें आरामदायक सफर का अधिकार नहीं मिलता है। क्योंकि यात्रियों की संख्या के अनुपात से करीब 100 बसें जिले में कम हैं। इसी वजह से ग्रामीण रूटों पर यात्रियों से खचाखच भरकर बसें चलती हैं। बसें बढ़ाने के लिए पत्राचार तक कार्रवाई सीमित है।
सोनीपत रोडवेज डिपो से वर्तमान में 210 बसों का संचालन हो रहा है। इसमें 15 बसें वातानुकूलित हैं। प्रतिदिन यात्रियों के किराये से 14 से 15 लाख रुपये का राजस्व डिपो अर्जित करता है। एक माह में साढ़े चार करोड़ के राजस्व की प्राप्ति सिर्फ यात्रियों के किराए से होती है। इसके बावजूद यात्रियों को किराया देने के बाद भी सुकून भरा सफर नहीं मिलता।
वजह यह है कि जरूरी अनुपात से काफी कम बसें यहां उपलब्ध हैं। तब और मुसीबत हो जाती है जब रोडवेज की बसे वीआईपी आयोजनों में भीड़ को ले जाने के लिए लगा दी जातीं हैं। कई रूट पर यात्रियों की बढ़ती संख्या का मूल्यांकन करने के बाद जिले में 310 बसों की जरूरत महसूस की जा रही है।
इसके लिए मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है। दो साल से प्रस्ताव लंबित है। स्थिति यह है कि 310 के अनुपात में 210 बसें ही जिले में संचालित हो रही हैं। रोडवेज डिपो के महाप्रबंधक संजय कुमार का कहना है कि बसें बढ़ाने को लेकर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। स्वीकृति मुख्यालय स्तर से होनी है।