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अस्पताल में आईसीयू में बेड के एक दिन के 25 हजार, ऑक्सीजन के 500 रुपये प्रति घंटा, अन्य में लेकर जाने पर मौत

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सोनीपत। शहर के अस्पतालों में कोरोना मरीजों के उपचार में किस तरह से लूट मचाई हुई, इसका एक बड़ा मामला सामने आया है। बहालगढ़ के एक अस्पताल में आईसीयू में बेड के एक दिन के 25 हजार रुपये वसूले गए तो ऑक्सीजन के 500 रुपये प्रति घंटा वसूल किए गए। उस अस्पताल में 13 दिन में 5.17 लाख रुपये वसूल करने के बाद मरीज की हालत खराब बताकर अन्य जगह लेकर जाने के लिए कह दिया। उसके बाद भी उनसे लूट बंद नहीं हुई और बहालगढ़ रोड पर दूसरे प्राइवेट अस्पताल में कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव दिखाने के बाद भी कोविड वार्ड में भर्ती कर लिया गया। इसके साथ ही प्लाज्मा चढ़ाने की बात कहते हुए दो यूनिट प्लाज्मा चढ़ा दिया और उसके आधे घंटे बाद ही मरीज की मौत हो गई। उसके बाद अस्पताल से शव लेने के लिए परिजन तीन घंटे तक भटकता रहे और सीएमओ कार्यालय के चक्कर काटने के बाद शव दिया गया।
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दिल्ली के कंझावला के रहने वाले डॉ. सिकंदर ने बताया कि उनके पिता इकबाल की अचानक तबीयत खराब होने पर उनको लेकर सोनीपत आया था। यहां बहालगढ़ के निजी अस्पताल में आईसीयू में भर्ती कर लिया गया और यहां वह 13 दिन तक भर्ती रहे। इस दौरान उनसे बेड के एक दिन के 25 हजार रुपये लिए गए तो 500 रुपये प्रति घंटा ऑक्सीजन के लिए है। इनके अलावा आरएमओ व नर्सिंग चार्ज के नाम पर भी 50 हजार से ज्यादा लिए गए।
डॉ. सिकंदर का आरोप है कि यह रुपये उस हालत में लिए गए, जबकि उसके पिता को देखने के लिए कोई नहीं आता था और उसे खुद जाकर पिता को शौच कराना पड़ता था। आरोप है कि इतने रुपये लेने के बाद उसके पिता की हालत खराब बताकर अन्य अस्पताल में लेकर जाने को कहा गया। वह वीरवार शाम को अपने पिता को बहालगढ़ रोड पर स्थित दूसरे अस्पताल में लेकर पहुंच गए। जहां उन्होंने अपने पिता की कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट दिखाई, लेकिन उनको कोरोना वार्ड में भर्ती किया गया। जिसके बाद उनसे कहा गया कि उसके पिता को दो यूनिट प्लाज्मा चढ़ाना पड़ेगा। जिसके बदले एक यूनिट उसने अपना प्लाज्मा भी दिया, क्योंकि वह भी कुछ दिन पहले कोरोना पॉजिटिव हुआ था। डॉ. सिकंदर ने आरोप लगाया कि प्लाज्मा चढ़ाने के करीब आधा घंटा बाद ही उसके पिता की मौत हो गई। वहां भी उससे करीब 28 हजार रुपये पहले जमा कराए गए और उसके पिता की मौत के बाद 50 हजार रुपये से ज्यादा जमा कराए गए। उनसे कहा गया कि उनके बीमा क्लेम से राशि स्वीकृत नहीं हो रही है और उनको वह रुपये देने होंगे। इस तरह से पिता की मौत के बाद भी अस्पताल में उन पर रुपये के लिए दबाव बनाया जाता रहा। उसके बाद भी अस्पताल में मानवता नहीं दिखाई गई और शव भी देने से इनकार कर दिया गया। लेकिन डॉ. सिकंदर इसके लिए सीएमओ कार्यालय पहुंचे और वहां से हस्तक्षेप के बाद अंतिम संस्कार के लिए शव दिया गया।
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सरकार ने इस तरह तय किए है उपचार के रेट
सरकार ने एनएबीएच मान्यता प्राप्त अस्पतालों में सामान्य बेड का 10000 रुपये, बिना वेंटिलेटर के आईसीयू बेड का 15000 रुपये व वेंटिलेटर वाले बेड का 18000 रुपये प्रतिदिन की दर से रेट तय किए हैं। इस तरह बिना एनएबीएच मान्यता प्राप्त अस्पतालों में आइसोलेशन बेड का 8000 रुपये, बिना वेंटिलेटर के आईसीयू बेड का 13000 रुपये व वेंटिलेटर युक्त आईसीयू बेड का 15000 रुपये प्रतिदिन की दर से रेट तय किए हुए हैं। इससे ज्यादा रेट लेने पर कार्रवाई का प्रावधान है।
वर्जन
अस्पताल का बिल मेरे सामने आया था, लेकिन उसमें किसी तरह की शिकायत अभी तक नहीं मिली है। इस मामले में शिकायत मिलने पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। क्योंकि इस तरह से कोई भी अस्पताल ज्यादा रेट नहीं वसूल सकता है।
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- श्यामलाल पूनिया, डीसी
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