सोनीपत। उत्तर भारत की सबसे पुरानी हिंदू शिक्षण संस्था के चुनाव से पहले बड़ा फैसला लिया गया है। संस्था के जिन 168 सदस्यों की सदस्यता को लेकर विवाद चल रहा था, अब उनको संस्था के पदाधिकारियों की बैठक करके नियमित सदस्यता देने पर मुहर लगाई गई है। इन सभी को 2013 में प्रधान रामकुमार मित्तल ने सदस्य बनाया था और स्टेट रजिस्ट्रार ने बैठक करके नियमित सदस्यता देने का आदेश दिया था। संस्था के इस फैसले के खिलाफ कुछ सदस्य दोबारा से जिला रजिस्ट्रार के पास चले गए और वहां इस फैसले के खिलाफ अपील की गई है। हालांकि संस्था का चुनाव 28 फरवरी को होना है और इन 168 सदस्यों के वोट काफी अहम साबित हो सकते हैं।
सोनीपत की हिंदू शिक्षण संस्था 103 साल पुरानी है। इसके 17 शिक्षण संस्थान चलते हैं। इस कारण ही शिक्षण संस्था में चौधर को लेकर जंग होती है। वर्ष 2017 के चुनाव में भी काफी खींचतान हुई थी और चुनाव स्थगित तक करना पड़ा था। वहीं इस बार 28 फरवरी को चुनाव होने है और कुर्सी पर काबिज होने के लिए जोर आजमाइश शुरू हो गई है। संस्था के प्रधान पवन कुमार गुप्ता व श्रीभगवान गुट के बीच हर बार सीधी टक्कर रहती है। लेकिन पिछले कई साल से संस्था के 168 सदस्यों की सदस्यता को लेकर चल रही खींचतान दोबारा से शुरू हो गई है। 26 मई 2013 को बाबू रामकुमार मित्तल की प्रधानी के समय वह 168 सदस्य बनाए गए थे। इन सभी के परिवार के लोग पहले संस्था में सदस्य थे और उनका संस्था को आगे बढ़ाने में योगदान रहा था। इस कारण ही पहले रहे ऐसे सदस्यों के परिवारों से सदस्य बनाने का फैसला लिया गया था। इनको सदस्य बनाने के खिलाफ पहले डिस्ट्रिक रजिस्ट्रार के यहां शिकायत की गई थी और वहां से उनकी सदस्यता रद कर दी गई थी। उस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसमें कुछ साल पहले ही हाईकोर्ट ने इसमें स्टेट रजिस्ट्रार को फैसला लेने के लिए कहा था। जिसमें स्टेट रजिस्ट्रार ने संस्था के पदाधिकारियों की बैठक करके इन 168 सदस्यों की सदस्यता को नियमित करने का आदेश दिया था। जिसके बाद मैनेजिंग कमेटी की दो दिन पहले ही बैठक बुलाकर इन सभी की सदस्यता को नियमित कर दिया गया। लेकिन इसमें अब दोबारा से खींचतान शुरू हो गई है और मैनेजिंग कमेटी के फैसले के खिलाफ जिला रजिस्ट्रार के पास अपील की गई है।
28 फरवरी को होने है संस्था के चुनाव, 168 सदस्य होंगे अहम
हिंदू शिक्षण संस्था के चुनाव से पहले हर बार इनकी सदस्यता को लेकर खींचतान होती है। वर्ष 2017 के चुनाव से पहले भी हाईकोर्ट तक मामला पहुंचा और इन 168 सदस्यों के वोट डालने पर रोक लगाए जाने से चुनाव को स्थगित करना पड़ा था। उसके बाद चुनाव कराए गए तो तभी से मामला शांत पड़ा हुआ था। लेकिन अब 28 फरवरी को संस्था के चुनाव कराए जाना तय हुआ है और उससे पहले दोबारा से इन 168 सदस्यों को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। इसका एक अहम कारण यह भी माना जा रहा है कि इन 168 सदस्यों की सदस्यता कायम रहती है तो हिंदू संस्था के 824 सदस्य हो जाते हैं और इनको वोट नहीं करने दिया जाता है तो केवल 656 सदस्य रहते हैं। इस तरह से 168 वोट चुनाव का फैसला बदलने में काफी अहम होते है। इसको देखते हुए भी काफी खींचतान होती है।
वर्जन
स्टेट रजिस्ट्रार के आदेश पर मैनेजिंग कमेटी की बैठक करके 168 सदस्यों को नियमित सदस्यता दी गई थी। यह मामला पिछले करीब 7 साल से चल रहा है और ऐसे में किसी एक मामले को इतना लंबा लटकाया जा रहा था। अब दोबारा से यह मामला जिला रजिस्ट्रार के यहां पहुंच गया है। लेकिन संस्था के चुनाव की तारीख तय हो चुकी है और यह सदस्य उसमें वोट करेंगे।
- पवन गुप्ता, प्रधान हिंदू शिक्षण संस्था