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ठेका कर्मियों की हड़ताल से डेढ़ घंटा बंद रही ओपीडी, मरीज रहे परेशान

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नागरिक अस्पताल में ओपीडी काउंटर के खुलने का इंतजार करते मरीज - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। नागरिक अस्पताल में चार माह से अटके वेतन की मांग को लेकर ठेका कर्मियों ने करीब डेढ़ घंटे तक हड़ताल रखी और सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। बिना पर्चे के ओपीडी शुरू नहीं हुई, इसका खामियाजा इलाज के लिए आने वाले मरीजों को झेलना पड़ा। कोई पैर में दर्द से कराहता रहा तो किसी के बेटा बुखार में तप रहा था। सर्दी के कारण मरीजों को काफी दिक्कत हुई। वहीं धरने पर बैठे कर्मियों को समझाने के लिए पीएमओ आदर्श शर्मा, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप लठवाल व डॉ. गिन्नी लांबा पहुंचे। जहां उन्होंने जल्द ही वेतन दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद अधिकारियों की ओर से बजट के लिए मुख्यालय सूचना दी गई। वहां से 3.71 करोड़ रुपये बजट की मंजूरी मिली।
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अस्पताल में तैनात ठेका कर्मियों का आरोप है कि उन्हें चार माह से वेतन तक नहीं मिल रहा। जिसके चलते उन्हें परिवार का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। ठेकेदार उन्हें समय पर एरियर का भुगतान भी नहीं करता है। कर्मियों ने अस्पताल प्रशासन व सिविल सर्जन को अपनी मांगों को लेकर अल्टीमेटम दिया था। मांगें पूरी नहीं होने पर वीरवार सुबह कर्मियों ने हड़ताल शुरू कर दी। साथ ही उन्होंने कहा कि जो ठेका कर्मी अपने वेतन या अन्य किसी समस्या को लेकर आवाज उठाता है तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। पीएफ के नाम पर भी बहुत कम राशि मिलती है।
नागरिक अस्पताल में वीरवार को ठेका कर्मियों के हड़ताल पर जाने के कारण करीब डेढ़ घंटे तक ओपीडी बंद रहने से मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई। उपचार कराने पहुंचे मरीजों व उनके तीमारदारों को सर्दी में ओपीडी के खुलने का इंतजार करना पड़ा। समय पर ओपीडी कार्ड नहीं बनने से मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। वीरवार सुबह करीब 10.30 बजे सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंचे पीएमओ डॉ. आदर्श शर्मा व अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों ने ठेका कर्मियों को शांत किया और जल्द ही वेतन दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद ओपीडी काउंटर खुलने के बाद मरीजों को राहत मिल सकी।
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हड़ताल के बाद मुख्यालय ने दी 3.71 करोड़ के बजट की मंजूरी
ठेका कर्मियों के हड़ताल पर जाने के बाद मरीजों को परेशानी का सामना पड़ा। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ. बीके राजौरा की तरफ से बजट के लिए मुख्यालय स्थित डीजी कार्यालय को पत्र लिखा गया। मुख्यालय से वीरवार दोपहर बाद 3.71 करोड़ रुपये के बजट की मंजूरी मिल पाई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही बजट मिलते पर कर्मियों के खाते में डाल दिया जाएगा। इसके बाद कर्मियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मरीजों और तीमारदारों का दर्द
अस्पताल में रक्त की जांच कराने के लिए आधा घंटा पहले आया था। कर्मियों की हड़ताल पर जाने से ओपीडी काउंटर बंद रहा। जिसके चलते उसे परेशानी का सामना करना पड़ा। अंशू शर्मा
मेरे पैरों में कई दिनों से दर्द हो रहा है। मैं सुबह अस्पताल में इलाज कराने के लिए पहुंचा तो ठेका कर्मी हड़ताल पर गए हुए थे और ओपीडी काउंटर पर लोग पर्ची बनवाने के लिए इंतजार कर रहे थे। सुनील कुमार
मेरी लड़की को घर के पास कुत्ते ने काट लिया था। अस्पताल में रेबिज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंची तो मरीज बाहर खड़े थे और ओपीडी काउंटर बंद होने से पर्ची नहीं मिल रही थी। बाद में पता चला की अस्पताल में रेबिज के इंजेक्शन ही खत्म है। रविना
मेरे लड़के तनिष्क को बुखार आ गया था। मैं उसे लेकर अस्पताल में आई तो वहां पर ओपीडी काउंटर बंद मिला। काफी देर तक ओपीडी काउंटर के खुलने का इंतजार करना पड़ा। मीना
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ठेका कर्मियों के हड़ताल के जाने के बाद मुख्यालय से बजट मांगा गया। वहां से 3.71 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल पाई है। वहां से बजट आते ही ठेकाकर्मियों में बांट दिया जाएगा।
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-डॉ. बीके राजौरा, सिविल सर्जन
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