एक तरफ ठंड बढ़ती जा रही है, दूसरी तरफ सिविल अस्पताल प्रशासन की अनदेखी के चलते नवजात शिशुओं की माताएं सात डिग्री के तापमान में ठंडे फर्श पर रात काटने को मजबूर हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से बनाए गए मदर रूम में न तो अस्पताल प्रशासन ने गर्म कंबल उपलब्ध कराए हैं, न ही हीटर की व्यवस्था की है। प्रसूताओं और उनके परिजनों को ठंड से बचने के लिए खुद ही जुगाड़ करना पड़ रहा है। लापरवाही का यह आलम तब है जब स्वयं डॉक्टर कहते हैं प्रसूताओं को कम से कम 15 दिन तक विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। उसे ठंड लगने की ज्यादा संभावना रहती है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन की बेरुखी समझ से परे है। गौरतलब है कि हर साल दिसंबर और जनवरी महीने में सर्दी चरम पर होती है। आधा दिसंबर बीत चुका है, जिसके चलते पिछले एक सप्ताह से पारा लगातार नीचे जा रहा है। मंगलवार को न्यूनतम तापमान जहां 6 डिग्री तक गिर गया था, वहीं बुधवार को 7 डिग्री पर अटका रहा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों को गर्म कंबल से लेकर डाइट तक उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन सिविल अस्पताल की चाल सरकारी आदेशों के बिल्कुल उलट है। मंगलवार को जहां दूध न आने पर प्रसूताओं को पूरी डाइट नहीं दी गई वहीं बुधवार को वही महिलाएं मदर रूम में फर्श पर नजर आईं, जिनके बच्चे नर्सरी में हैं।
प्रतिदिन एक दर्जन महिलाओं की हो रही डिलीवरी
अस्पताल के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो प्रतिदिन एक दर्जन के करीब गर्भवती महिलाएं अस्पताल में भर्ती होती हैं। इसके लिए प्रसूति वार्ड में छह कमरे हैं। एक कमरे में छह से सात बेड पड़े हैं, जहां बच्चों के साथ उनकी माताएं रहती हैं। अस्पताल प्रशासन ने उन माताओं के लिए मदर रूम बना रखा है, जिनके बच्चे नर्सरी में दाखिल हैं। बुधवार को नर्सरी में पांच बच्चे दाखिल थे, लेकिन मदर रूम में ठंड से बचने के लिए किसी तरह की व्यवस्था नहीं की गई थी। परिजनों ने बताया कि प्रसूताओं को ठंड से बचाने के लिए वह स्वयं घर से कंबल और रजाई लेकर आए हैं। अस्पताल प्रशासन ने ठंड से बचने के लिए कुछ नहीं दिया है। अस्पताल में प्रसूताओं को दो दिन तक बेड पर रखा जाता है तो नर्सरी में दाखिल बच्चों की माताओं को तीसरे दिन मदर रूम में फर्श पर लेटने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
प्रसूति वार्ड में बेड की कमी
प्रसूति वार्ड में बेड की कमी के चलते डिलीवरी के दो दिन बाद ही प्रसूता को छुट्टी देकर घर भेज दिया जाता है। जिन माताओं के बच्चे नर्सरी में हैं, उनको मदर रूम में बिछे फटे हुए गद्दों पर ठहरने के लिए मजबूर किया जाता है।
मदर रूम में उन माताओं को ठहराया जाता है, जिनके बच्चे नर्सरी में दाखिल हैं। ठंड शुरू हो चुकी है, अब माताओं के लिए मदर रूम में हीटर व कंबल की व्यवस्था कर दी जाएगी।
-डा. सीपी अरोड़ा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, सिविल अस्पताल