राइस रिसर्च स्टेशन कौल के रीजनल डायरेक्टर डॉ. मेहरचंद ने बताया कि धान की लंबी अवधि वाली किस्मों की अभी कटाई नहीं हुई है। बारिश आने से इनमें बीमारियों के आने की खतरा है। तेज हवा चलती है तो गन्ने की फसल नीचे गिर जाएगी जिससे पैदावार पर असर पड़ सकता है।
हरियाणा में बुधवार से 12 अक्तूबर तक तेज हवा और गरज के साथ बारिश के आसार हैं। बारिश होती है तो प्रदेशभर की मंडियों में खुले में पड़ा लाखों क्विंटल धान, बाजरा और मूंग सहित अन्य फसलों के भीगने की आशंका है। मौसम में बदलाव को लेकर किसानों में चिंता का माहौल है।
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मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के मुताबिक बारिश होने और हवाओं की दिशा में बदलाव से दिन और रात के तापमान में भी गिरावट आएगी।आसमान साफ रहने और लगातार पश्चिमी हवाओं के चलने से दिन व रात के तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रहा है। अब एक बाद एक तीन पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से मौसम में बदलाव आएगा।
7 अक्तूबर की रात एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। हालांकि इससे असर से सिर्फ उत्तरी जिलों में ही बारिश की संभावना है। पश्चिमी व दक्षिणी जिलों में बादलवाही और कहीं-कहीं बूंदाबांदी हो सकती है। 9 अक्तूबर की रात एक और विक्षोभ सक्रिय होगा जिससे उत्तरी और उत्तरी पश्चिमी जिलों में बारिश की संभावना है। इसके बाद 13 अक्तूबर की रात को पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम में बदलाव आएगा। इनके असर उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी भी हो सकती है।
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राइस रिसर्च स्टेशन कौल के रीजनल डायरेक्टर डॉ. मेहरचंद ने बताया कि धान की लंबी अवधि वाली किस्मों की अभी कटाई नहीं हुई है। बारिश आने से इनमें बीमारियों के आने की खतरा है। तेज हवा चलती है तो गन्ने की फसल नीचे गिर जाएगी जिससे पैदावार पर असर पड़ सकता है। बाजरा विशेषज्ञ डॉ. अनिल ने बताया कि बाजरे की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है। ऐसे में खेतों में तो नुकसान नहीं है लेकिन मंडियों में खुले में पड़ा बाजरा भीगने से दाना काला पड़ सकता है।