नगर निगम एरिया में रह रहे डेढ़ लाख के करीब लोगों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए प्रशासन एक कदम आगे बढ़ गया है। अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए दो माह पहले शुरू किया गया सर्वे पूरा हो गया है, इसके तहत 40 नहीं, बल्कि 28 कॉलोनियों को चयनित किया गया है। इस सूची को अगले सप्ताह नगर निगम प्रशासन चंडीगढ़ मुख्यालय शहरी एवं निकाय विभाग के पास भेजेगा, ताकि उक्त कॉलोनियों को वैध किया जा सके। निगम के माध्यम से निजी सर्वे एजेंसी ने यह सूची 31 मार्च 2015 को आधार डेट मानकर तैयार की है।
नगर परिषद से निगम बनने के साथ ही शहर में अवैध कॉलोनियों का दायर बढ़ गया है, क्योंकि हाल में निगम में शामिल राई, मुरथल और सोनीपत ब्लॉक की 26 पंचायतों के आने से निगम का भौगोलिक एरिया दो गुणा हो गया है। इसके चलते अवैध कॉलोनियों की संख्या भी करीब 40 हो गई है, जहां आधिकारिक तौर पर नगर निगम बिजली, सड़क और सीवरेज की सुविधाएं नहीं दे सकता। इसके लिए प्रदेश सरकार से पहले कॉलोनी को वैध कराना पड़ता है। इसी के चलते शहरी निकाय विभाग के निदेशक ने दिसंबर महीने में नगर निगम प्रशासन को पत्र भेजकर अवैध कॉलोनियों की सर्वे रिपोर्ट मांगी थी। निगम ने यह सर्वे निजी एजेंसी से कराया है।
छह कॉलोनियों को तो लंबे समय से वैध होने का इंतजार
2013 में तत्कालीन नगर परिषद प्रशासन ने शहर की 22 कॉलोनियों को वैध करने के लिए फाइल चंडीगढ़ शहरी निकाय विभाग के पास भेजी थी, जहां 16 कॉलोनियों को तो वैध कर दिया गया, लेकिन नियम पूरे न होने के चलते इंडियन कॉलोनी, लक्ष्मी नगर, राजीव कॉलोनी, मयूर विहार का बाहरी हिस्सा और एक अन्य को वैध घोषित नहीं किया जा सका। इस कारण धरातल पर विकास कार्य कराते समय आज भी अधिकारियों को कठिनाई होती है। निगम प्रशासन के मुताबिक अब नए सर्वे में उक्त छह कॉलोनियों को भी शामिल किया गया है।
26 गांवों में लालडोरे के बाहर बनी 12 से 15 कालोनी
जुलाई 2015 में प्रदेश सरकार ने सोनीपत नगर परिषद को नगर निगम का दर्जा दे दिया। इसके चलते राई, मुरथल और सोनीपत ब्लॉक की 26 पंचायतों को निगम में शामिल करना पड़ा। अब निगम की सीमा जीटी रोड से आगे यमुना की तरफ दीपालपुर, कमासपुर और खेवड़ा से आगे तक हो गई है। ऐसे में निगम ने नए सिरे से उक्त गांवों के एरिया को भी शामिल किया है। सूत्रों ने बताया कि नए एरिया में 12 से 15 कॉलोनी चयनित की गई है। जबकि लाल डोरे के अंदर बने गांवों को पहले से ही नियमों के तहत वैध रखा गया है।
इन नियमों के तहत किया गया सर्वे
-जिस कॉलोनी में 31 मार्च 2015 तक 50 प्रतिशत एरिया रिहायशी रहा।
-जिस एरिया में किसी भी तरह की सरकारी या विवादित जमीन नहीं मिली।
-नियमों के तहत मकानों और गलियों का निर्माण किया गया है।
-बिजली, पानी, सीवरेज और सड़क देने के लिए किसी तरह की भौगोलिक रुकावट नहीं मिली।
गोहाना, गन्नौर और खरखौदा से भी मांगी गई रिपोर्ट
शहरी निकाय विभाग के निदेशक की ओर से भेजे गए पत्र में सोनीपत नगर निगम एरिया के साथ-साथ गोहाना नगर परिषद, खरखौदा और गन्नौर नगर पालिका एरिया की अवैध कालोनियों की भी रिपोर्ट मांगी गई थी। मुख्यालय की हिदायतों के तहत डीसी एवं निगम आयुक्त ने तीनों जगह से सर्वे रिपोर्ट मांगी है।
सर्वे पूरा, अगले सप्ताह भेज देंगे रिपोर्ट
शहरी निकाय विभाग की हिदायतों के तहत सर्वे किया गया है। अनुमान था कि अवैध कॉलोनियों की संख्या 40 के करीब होगी, लेकिन 28 कॉलोनियां ही मापदंडों पर खरा उतर सकीं। जल्द सूची को फाइनल करके मुख्यालय मंजूरी के लिए भेज दी जाएगी।
-टीएल शर्मा, एक्सईएन नगर निगम, सोनीपत
हुड्डा सरकार के समय भेजी गई थी 22 कॉलोनियों की सूची, छह अभी तक लटकी
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के समय में 2013 को तत्कालीन नगर परिषद प्रशासन ने 22 कॉलोनियों को वैध करने के लिए सूची चंडीगढ़ भेजी थी, जिसमें राजीव विहार, जीवन नगर, शिव कॉलोनी, चावला कालोनी, ऋषि कालोनी, हनुमान नगर, प्रगति नगर व छोटूराम कॉलोनी, शास्त्री कॉलोनी, इंडियन कॉलोनी, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर, सरस्वती विहार, विकास नगर, मायापुरी, कीर्ति नगर, इंदिरा नगर, भगत सिंह कॉलोनी, गोविंद नगर, पटेल नगर, कैलाश कॉलोनी, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का बाहरी हिस्सा, शादीपुर और कबीरपुर शामिल हैं। इनमें से 16 तो वैध हो गई, लेकिन छह को आज भी इंतजार है।