शिक्षा के मायने हर व्यक्ति की नजर में समान होते हैं। शिक्षा शब्द का नाम लेते ही हमारे दिमाग में सबसे पहले अनुशासनात्मक वातावरण घूम जाता है। शिक्षा का क्षेत्र हमें एक सम्मानजनक छवि प्रदान करता है। इसके साथ देश को उत्थान की ओर अग्रसर करता है। जिस देश के युवा शत-प्रतिशत शिक्षित होंगे, वह देश कभी पिछड़ा हुआ नहीं रह सकता। यह कहना है गन्नौर खंड के गांव रामनगर निवासी राजेश कुमार का, जो अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए जेबीटी अध्यापक बने।
जेबीटी अध्यापक राजेश कुमार ने बताया कि उनके पिता भीम सिंह जेबीटी अध्यापक रहे हैं। सितंबर 2005 में वे इस सम्मान के पद से सेवानिवृत्त हुए। गांव व स्कूल में पिता के प्रति लोगों के मन में आदरभाव को देख बचपन में ही पिता की भांति अध्यापक बनने का सपना संजो लिया था। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए पिता के मार्गदर्शन में कड़ी मेहनत की और अक्तूबर 2020 में जेबीटी अध्यापक नियुक्त हुए। राजेश कुमार बताते हैं कि वह वर्तमान समय में राजकीय प्राथमिक पाठशाला भाखरपुर में पढ़ाते हैं।
शिक्षक परिवार से रहा है नाता
राजेश कुमार ने बताया कि उनका शिक्षक परिवार से नाता रहा है। मेरे पिता भीम सिंह शिक्षक रहे हैं। उनके बाद मैं भी शिक्षक बना। मेरी शादी शिक्षिका रेखा से हुई। जो वर्तमान समय में राजकीय प्राथमिक पाठशाला गढ़ी कलां में कार्यरत हैं। यही नहीं छोटे भाई की पत्नी सोनू भी जेबीटी अध्यापिका हैं और राजकीय प्राथमिक पाठशाला में कार्यरत हैं। मेरे सास-ससुर भी इसी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। ससुर धर्मपाल शर्मा अंबाला से जिला शिक्षा अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए और सास उषा रानी एसएस अध्यापिका के पद से सेवानिवृत्त हैं।
जेबीटी अध्यापिका रेखा।- फोटो : Sonipat
जेबीटी अध्यापक राजेश कुमार।- फोटो : Sonipat
राजेश कुमार के ससुर धर्मपाल शर्मा और सास उषा रानी।- फोटो : Sonipat