हिंदू विद्यापीठ वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के मैदान
में जिला प्रशासन की ओर से गीता जयंती महोत्सव में दूसरे दिन हरियाणा
विधानसभा के अध्यक्ष कंवरपाल गुर्जर मुख्य अतिथि रहे। वर्तमान परिप्रेक्ष्य
में श्रीमद्भागवत गीता की प्रासंगिकता विषय पर स्पीकर गुर्जर ने कहा कि
वेदों का सार पुराणों में है और पुराणों का सार गीता में समाहित है। गीता
विश्व का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है, जिसे हर घर में प्राथमिक चिकित्सा के रूप
में रखा जाना चाहिए। हर समस्या का समाधान गीता दे सकती है।
हालांकि,
रविवार को छुट्टी का दिन होने के बावजूद लोग कम नजर आए। रविवार को सिर्फ
मुख्यातिथि बदले थे, लेकिन दर्शक दीर्घा में स्थिति पहले जैसी ही रही।
मुख्य अतिथि के जाते ही दर्शक भी नदारद हो गए। इससे पहले, कंवरपाल गुर्जर
ने दीप प्रज्ज्वलित कर सेमिनार का शुभारंभ किया।
उन्होंने कहा कि पंथवाद
होता है और 24 पंथ व 6 दर्शन बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि नैतिकता व
कर्तव्य को धर्म कहा जा सकता है। गुर्जर ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता के
मात्र दो श्लोक ही संपूर्ण जीवन को सही दिशा में परिवर्तित करने के लिए
पर्याप्त हैं। गीता में वह शक्ति है जो हारे हुए निराश व्यक्ति को पुन:
संपूर्ण बल एवं आशा के साथ खड़ा कर सकती है। यदि भारत गीता को आत्मसात कर
आगे बढ़े तो हिंदुस्तान फिर से विश्व गुरु का दर्जा हासिल कर सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय माहरा की छात्राओं
ने सरस्वती वंदना तथा स्वागत गीत की प्रस्तुति से की। संबोधन से पहले,
कंवरपाल गुर्जर ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उपायुक्त राजीव रतन
ने हरियाणा विधानसभा स्पीकर को स्मृति चिन्ह एवं गीता की प्रति भेंट की। इस
मौके पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव जैन, ललित बतरा,
आजाद नेहरा, बलजीत मलिक, राकेश मलिक, मनींद्र सन्नी, रविंद्र दिलावर,
मोहनलाल बड़ौली, अरुण अग्रवाल, पवन गुप्ता मौजूद रहे।
बच्चों ने बिखेरा अपनी कला का जादू
महोत्सव
के दौरान बालिका माधवी ने संस्कृत में गीता के श्लोकों का उच्चारण किया।
मुख्य अतिथि गुर्जर ने माधवी को सम्मानित किया। दूसरे दिन ठाकुरद्वारा
मंदिर के महात्मा हरिदास द्वारा गीता प्रश्नोत्तरी का पहला पुरस्कार
सूर्यप्रकाश ने जीता। इसके उपरांत महात्मा हरिदास ने गीता से संबंधित
विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर देने वाले डा. मूलराज शर्मा, देवेंद्र
वर्मा, ऊषा भंडारी इत्यादि को पुरस्कृत किया गया। सम्मानित वक्ताओं में
साध्वी दिविशा भारती, डॉ. महेश दाधिच, महात्मा हरिदास, डॉ. प्रज्ञा
अग्रवाल, डॉ. सुभाष सचदेव, बहन प्रमोद, डॉ. सुधीर कुमार गर्ग, डॉ. दिनेश
कुमार, डॉ. विकास, अशोक खत्री, डॉ. सुमन नासा शामिल रहीं।
विरासत में मिला अध्यात्म ज्ञान : साध्वी दिविशा भारती
कार्यक्रम
की मुख्य वक्ता, श्री दिव्य जागृति संस्थान से जुड़ी साध्वी दिविशा भारती
ने श्रीमद्भागवत गीता को सब धार्मिक ग्रंथों की माता की संज्ञा देते हुए
कहा कि इस प्रकार के ग्रंथों से भारतीयों को अध्यात्म ज्ञान विरासत में
मिला है, जिसको बढ़ावा देने के साथ संरक्षण करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि
आंतरिक सफलता एवं ऊंचाइयों को छूने के लिए अध्यात्म ज्ञान जरूरी है।
आयुर्वेदिक
चिकित्सक डॉ. महेश दाधीच ने भी गीता में जीवन दर्शन विषय के अंतर्गत
जानकारी दी। संस्कृत के प्राध्यापक डॉ. सुभाष सचदेव, दीनबंधु छोटूराम
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल के प्रोफेसर डॉ. सुधीर कुमार
गर्ग, प्राध्यापिका डॉ. प्रज्ञा अग्रवाल, डॉ. विकास तथा डॉ. दिनेश कुमार
ने भी गीता ज्ञान को अपने ढंग से प्रस्तुत किया।
100 विद्यार्थी नाटिका के माध्यम से देंगे गीता का ज्ञान
पानीपत
के दिल्ली पब्लिक स्कूल के 100 विद्यार्थी नाटिका के माध्यम से दर्शकों को
गीता का ज्ञान प्रदान करेंगे। नाटिका का मंचन हिंदू विद्यापीठ वरिष्ठ
माध्यमिक विद्यालय में जारी गीता जयंती महोत्सव के अंतिम दिन 21 दिसंबर को
सांस्कृतिक संध्या के दौरान किया जाएगा। सूचना, जन संपर्क एवं सांस्कृतिक
कार्य विभाग तथा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सहयोग से नीफा द्वारा रचित
नृत्य नाटिका की अध्यापिका प्रिया के निर्देशन में तैयारियां चल रही है।