हरियाणा के सोनीपत में दिल्ली-एनसीआर में शामिल सोनीपत में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू होने के बाद भी सोनीपत में शनिवार को एप पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 340 दिखाई दे रहा है। एप पर दिख रहे अन्य शहरों में यह सबसे अधिक दिख रहा है। हालांकि सुबह यह 321 था, लेकिन देर शाम यह 340 पर पहुंच गया। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खराब है।
प्रदूषण फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। न तो उद्योगों की तरफ से खुले में जहरीला कचरा जलाए जाने के मामलों में कमी आ रही है और न ही पराली जलाने पर पूर्णतया रोक लग पाई है। अधिकारियों ने एनजीटी के आदेश पर 15 दिनों में कई जगह कूड़ा जलाए जाने पर कार्रवाई की है, लेकिन आग लगने के मामले में अब भी सामने आ रहे हैं।
शनिवार शाम को सोनीपत में एक्यूआई 340 पर पहुंच गया। यह बेहद खराब श्रेणी में आता है। सुबह से दोपहर तक यह 321 दर्ज किया गया था। बेहद खराब श्रेणी में होने के चलते हृदय, दमा रोगियों को सर्वाधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे में कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) ने 1 अक्तूबर से ग्रैप लागू कर दिया है। ग्रैप के बावजूद सोनीपत में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक दिख रहा है।
एप पर दिखाई दे रहे आंकड़े में सोनीपत देश में सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। सोनीपत के बाद मुजफ्फरनगर का एक्यूआई में 306, करनाल का 282 व कुरुक्षेत्र का 270 दिखाई दिया। ग्रैप लागू होने से प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर पाबंदी लगा दी गई है। औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर रोक लगाई गई है, लेकिन एनजीटी के आदेशों को खूब धुआं धुआं किया जा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्टरियों से निकलने वाला जहरीला वेस्ट खुलेआम आग के हवाले किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में हालात ऐसे हैं कि कूड़े को रात के समय आग के हवाले कर दिया जाता है। राई व कुंडली क्षेत्र में लगातार कूड़े को आग के हवाले किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। इस कारण घंटों आसपास का वातावरण बेहद प्रदूषित रहा और लोगों का सांस लेना भी दूभर हो गया।
दिन में की गई कार्रवाई तो रात को लगे जलाने
फैक्टरियों के जहरीले कूड़े में आग लगाने से लगातार फैल रहे प्रदूषण की शिकायत बढ़ने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने कार्रवाई भी की है। 15 दिनों में कूड़े में आग लगाने के दो मामलों में चालान किए गए हैं और प्रत्येक पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, लेकिन इसके बावजूद उद्योगपति व अन्य लोग नहीं मान रहे हैं। अब दिन की बजाय रात के समय कूड़े को आग के हवाले कर रहे हैं, जिससे हवा प्रदूषित हो रही है।
खेतों में अवशेष जलाने से भी बढ़ा प्रदूषण
खेतों में अवशेष जलाए जाने की घटनाओं पर प्रशासन लगातार नजर रखे हुए और किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। उसके बावजूद फसल अवशेष जलाए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। अब तक फसल अवशेष जलाने पर किसानों पर 67 हजार रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है। सप्ताह भर में पांच स्थानों पर पराली जलाने के मामले में सामने आए हैं। हालांकि शनिवार को कोई मामला सामने नहीं आया।
ग्रैप पीरियड लागू है। पिछले दिनों उपायुक्त ने बैठक लेकर उद्योगपतियों को सलाह दी थी कि प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर रोक लगाएं। फैक्टरियों से निकलने वाले कूड़े में आग लगाने से वातावरण में खतरनाक प्रदूषण फैलता है। लगातार नजर रखी जा रही है और कूड़ा जलाने वालों पर कार्रवाई भी की जा रही है।
-अमित कुमार, एसडीएम, सोनीपत।