सोनीपत। फर्जी पासपोर्ट बनवाने के खेल में पंजाब पुलिस के जवानों और पासपोर्ट कर्मियों की मिलीभगत का खुलासा हुआ है। इसके बाद से एसटीएफ अब इस पूरे मामले की तह तक जाने की तैयारी में जुट गई है। गिरफ्तार हेड कांस्टेबल ने खुद 57 फर्जी पासपोर्ट बनवाने की बात कुबूल की है, लेकिन पुलिस को ज्यादा का शक है। जिसके चलते पुलिस बारीकी से हर पहलू को खंगाल रही है। एसटीएफ टीम का कहना है कि जिसकी भी संलिप्तता होगी उस हर आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा।
राजू बसौदी की गिरफ्तारी और उसके नाम बदलकर विदेश भागने के खुलासे के बाद एसटीएफ की जांच में सामने आया कि फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने वाला पंजाब में पूरा गैंग चल रहा है। इसमें फर्जी कागजात तैयार कराने, जांच कर सत्यापन कराने, पासपोर्ट कार्यालय से उसको पास कराने और पासपोर्ट प्रिंट कराकर आरोपियों तक पहुंचाने का काम अलग-अलग लोग करते हैं। इसमें फर्जी पते को सत्यापित कर सही ठहराना और जांच पूरी कराकर पासपोर्ट कार्यालय भिजवाने का काम राजेंद्र का था। उसने एसटीएफ को बताया कि उनका गैंग 57 से ज्यादा फर्जी पासपोर्ट तैयार कराकर उपलब्ध करा चुका है। इनमें करीब 43 पासपोर्ट लारेंस बिश्नोई और काला जठेड़ी गैंग के सदस्यों के हैं। इनमें एक राजू बसौदी का भी था। उनके गैंग के सदस्यों के नाम बताने में असमर्थता जताते हुए कहा कि सभी के नाम बदले होने से असली का पता नहीं होता। एसटीएफ जांच कर रही है कि फर्जी पासपोर्ट बनवाने वालों में से कितने विदेश भाग चुके हैं।
एसटीएफ का कहना है कि पुलिस व पासपोर्ट कर्मियों का नाम फर्जी पासपोर्ट बनवाने में आने के बाद मामला बड़ा बन गया है। जिससे मामले में हर पहलू की गहनता से जांच कर आगे बढ़ा जा रहा है। पुलिस मामले में छोटे-छोटे से सबूत को जुटाने में लगी है। जिससे इस मामले में संलिप्त सभी आरोपी पकड़ में आ सके।
फर्जी पासपोर्ट बनाने की रिपोर्ट पहले ही दर्ज कर ली गई थी। इसमें वर्ष 2020 में पंजाब पुलिस का नाम सामने आया। टीम जांच के लिए पंजाब के जिरकपुर थाने पहुंची और संदिग्ध पुलिसकर्मियों की जांच शुरू की। इसके तत्काल बाद जिरकपुर पुलिस ने भी रिपोर्ट दर्ज कर ली। उसने फर्जी पासपोर्ट में शामिल मुंशी सुखविंदर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और गैंग के सदस्य राजेंद्र को बचाने का प्रयास किया। एसटीएफ ने राजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है और सुखविंदर को प्रोडक्शन वारंट पर लाएंगे। पंजाब पुलिस के अन्य कर्मियों की संलिप्तता का पता लगा है। किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
- सतीश देशवाल, प्रभारी, एसटीएफ सोनीपत।