सोनीपत। लग्जरी कारें चोरी कर बेचने वाले गिरोह के गाड़ियों के जाली कागजात तैयार करने के आरोपी चरखी दादरी के तत्कालीन ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर व दो अन्य ने जाली कागजात की फाइलों को जला दिया है। रिमांड अवधि में इसका खुलासा हुआ है। साथ ही पता लगा कि वह आरसी बनाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले कोड के बारे में अधिकारी को विश्वास में लेकर पूछ लेते थे। जिसके बाद वह स्वयं ही कोड का प्रयोग कर गाड़ियों के जाली कागजात बना देते थे। पुलिस ने रिमांड अवधि के दौरान कई सीक्रेट फाइल बरामद की हैं। इस मामले में अन्य कर्मियों की भी गिरफ्तारी हो सकती है।
विदित रहे कि एसटीएफ की टीम 23 जुलाई को देर रात मुरथल क्षेत्र से चार आरोपियों को चोरी की गाड़ियों समेत पकड़ा था। जिसमें चरखी दादरी के गांव कोलवास का निरंजन, हिसार के गांव मय्यड़ का डाक्टर नवनीत उर्फ सोनू, सोनीपत के गांव पिपली खेड़ा का प्रदीप उर्फ सैंडी व रोहतक के मोरखेड़ी गांव का अजय थे। बाद में पता लगा था कि कुख्यात विकास भदाना, प्रदीप पिपली व डाक्टर सुनील गैंग के सदस्य हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो फॉरच्यूनर, क्रेटा व स्कॉर्पियो व फर्जी कागजात और अवैध देशी पिस्तौल व 10 कारतूस बरामद किए थे। बाद में टीम ने पिपली के प्रदीप को गिरफ्तार कर लिया था। 10 हजार रुपये के इनामी प्रदीप की निशानदेही पर दो स्कॉर्पियो, होंडा सिटी व फॉरच्यूनर को बरामद किया था। जांच में सामने आया था कि आरोपी चोरी की गाड़ियों के चेसिस नंबर व रजिस्ट्रेशन नंबर में फेरबदल कर बेच देते थे। बाद में चरखी दादरी के वार्ड-2 के रहने वाले मनोज व मूलरूप से गांव पिपली फिलहाल बादली रोड बहादुरगढ़ के जयबीर को पकड़ा गया। दोनों चरखी दादरी अथारिटी में दलाल का काम करते थे। उन्होंने 14 वाहनों की रजिस्ट्रेशन कराना कबूल किया था। उनसे काफी सामान भी बरामद किया गया था। बाद में आरटीए चरखी दादरी कार्यालय में तैनात रहे ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर संदीप को गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल अंबाला में नियुक्त था। इसके साथ ही बेरी, झज्जर एसडीएम कार्यालय के रजिस्ट्रेशन क्लर्क सुरेंद्र व डाटा आपरेटर मुकेश को गिरफ्तार किया था। तीनों को दो दिन के रिमांड पर लिया था। रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों ने बताया कि उन्होंने आरटीए कार्यालयों से चोरी की गाड़ियों से संबंधित रिकॉर्ड गायब कर जला दिया था। जिससे रिकार्ड के बारे में कुछ सबूत नहीं मिल सका। पुलिस ने कुछ सीक्रेट कागजात अवश्य बरामद किए हैं। पुलिस उनके आधार पर जांच को आगे बढ़ाएगी। तीनों को रिमांड अवधि पूरी होने पर अदालत में पेश किया, जहां उन्हें जेल भेज दिया गया।
अधिकारियों को विश्वास में लेकर पूछ लेते कोड
एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी अधिकारियों को विश्वास में लेकर कोड पूछ लेते थे। वह अधिकारी की व्यस्तता का फायदा उठाकर कोड पूछ लेते थे और उसका बाद में गलत प्रयोग करते थे। कोड की सहायता से वह चोरी की गाड़ियों की आरसी के लिए डाटा खुद फीड कर देते थे। साथ ही फाइल मैन्युअल तैयार होने के चलते अधिकारी के डाटा की जांच के दौरान उन फाइलों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती थी।
अन्य कर्मियों की संलिप्तता उजागर
एसटीएफ की टीम ने गिरफ्तार आरोपियों से कई सीक्रेट कागजात बरामद किए हैं। इसके साथ ही पूछताछ में कई अन्य कर्मियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर या नोटिस भेजकर पूछताछ में शामिल करेगी। उनके खिलाफ सबूत मिलने पर गिरफ्तार किया जाएगा।
लग्जरी गाड़ियों के जाली कागजात बनाने के मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने फाइल जलाने की बात कबूल की है। वहीं अन्य कर्मियों के नाम भी सामने आए हैं। साथ ही आरसी बनाने के कोड के बारे में आरोपियों ने बताया है कि वह अफसर को विश्वास में लेकर या उनकी व्यस्तता के चलते कोड पूछ लेते और उसका प्रयोग करते थे।
-सतीश देशवाल, प्रभारी, एसटीएफ सोनीपत।