- जाट-झोटा प्रकरण में निलंबित एसई की आत्महत्या के बाद बिजली निगम में सन्नाटा
- सोनीपत के एसई समेत चार अधिकारियों पर लगाए आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। बिजली निगम के पूर्व एसई गीतू राम की आत्महत्या के मामले में आरोपों के घेरे में आए एक्सईएन व एसडीओ के कार्यालय से गायब होने और मोबाइल फोन बंद मिलने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है। ‘जाट-झोटा’ प्रकरण में निलंबित किए गए एसई गीतूराम तंवर की आत्महत्या के बाद से बिजली निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। आत्महत्या से पहले निलंबित एसई ने सोनीपत के एसई समेत चार अधिकारियों पर गंभीर जातिगत टिप्पणी सहित कई गंभीर आरोप लगाए थे।
मामले में नाम सामने आने के बाद आरोपी अधिकारियों की गतिविधियों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बताया जा रहा है कि एक्सईएन रणबीर देशवाल, राजसिंह और एसडीओ प्रदीप कार्यालय नहीं पहुंचे और दोनों के मोबाइल फोन भी बंद हैं। बताया गया कि प्रदीप छुट्टी पर गए थे तो अश्विनी कौशिक सुबह कार्यालय में आने के बाद फील्ड में चले गए थे। ऐसे में पुलिस की जांच में इन अधिकारियों की भूमिका और उनके बयानों को अहम माना जा रहा है।
पूर्व एसई ने आत्महत्या से पहले कथित तौर पर एक वीडियो/संदेश के माध्यम से अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद बिजली निगम में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां आत्महत्या से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।
निगम के अधिकारियों में भी बेचैनी
सुसाइड नोट में सोनीपत के एसई मनिंद्र कादियान को भी नाम शामिल है। आरोपों में नाम आने के बाद निगम के अधिकारियों में बेचैनी है। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पूर्व एसई ने किन परिस्थितियों में आत्महत्या की।
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आरोपों की जांच में सहयोग करूंगा : कादियान
एसई मनिंद्र कादियान ने कहा कि ‘जाट-झोटा’ प्रकरण में उनका नाम गलत आया है। उस समय वह पंचकूला में तैनात थे। एसडीओ प्रदीप छुट्टी पर थे, जबकि एक्सईएन अश्विनी कौशिक फील्ड में गए थे। उन्होंने कहा कि वह दिनभर कार्यालय में मौजूद रहे। अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर वह पुलिस जांच में शामिल होंगे।