सरकार के इस प्रस्ताव पर किसान नेता अब गुरुवार को बैठक कर फैसला लेंगे ताकि अगले दिन सरकार को बैठक में जवाब दिया जा सके। हालांकि किसान नेता अभी सरकार के इस प्रस्ताव पर राजी होते नहीं दिख रहे है और अधिकतर किसान नेता कृषि कानून रद्द करने की बात पर ही अड़े हुए हैं। हालांकि वह इस बात को भी कहते हैं कि इस पर फैसला गुरुवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में लेकर साफ कर दिया जाएगा कि आखिर आगे की रणनीति क्या रहने वाली है।
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अब हर किसी की नजर किसान नेताओं की बैठक पर टिकी है वहीं सरकार भी किसानों के फैसले पर नजर रखेगी। किसानों के इस फैसले से गणतंत्र दिवस की किसान ट्रैक्टर परेड का भविष्य भी टिका हुआ है। जिसके लिए किसान कई दिनों से तैयारी कर रहे हैं।
किसान केवल एक ही मांग कर रहे हैं कि कृषि कानूनों को रद्द किया जाए और एमएसपी पर फसल खरीद की गारंटी दी जाए। सरकार ने केवल एक कदम बढ़ाते हुए कानून स्थगित करने का प्रस्ताव दिया है। इस पर क्या फैसला लेना है, यह संयुक्त किसान मोर्चा लेगा। संयुक्त किसान मोर्चा फैसला लेकर सरकार को बता देगा। जिस तरह से सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाया है, यह गणतंत्र दिवस पर होने वाली किसान ट्रैक्टर परेड के दबाव का असर है। उस ट्रैक्टर परेड में लाखों किसान शामिल होंगे। -अभिमन्यु कोहाड़, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा
सरकार पर किसानों को विश्वास नहीं है, क्योंकि सरकार कहती कुछ है और करती कुछ है। इसलिए सरकार को पहले कुछ करके दिखाना होगा। उसके बाद ही किसान आगे कुछ सोचेंगे। सरकार कृषि कानूनों को स्थगित करना चाहती है तो वह सुप्रीम कोर्ट में यह लिखित में देकर उनको दो साल के लिए स्थगित कराए। हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में इसको लेकर चर्चा होगी और उसके बाद ही फैसला होगा। - शमशेर दहिया, महासचिव, भाकियू अंबावता
सरकार ने अभी केवल प्रस्ताव दिया है और इससे यह भी साफ हो गया कि किसानों की मांग जायज है। सरकार खुद भी मानती है कि कानून ठीक नहीं है और उनको अभी स्थगित कर दिया जाए। संयुक्त किसान मोर्चा की गुरुवार को बैठक होगी, जिसमें किसी तरह का फैसला लिया जाएगा। क्योंकि यह किसी एक की लड़ाई नहीं है, बल्कि करोड़ों किसानों की लड़ाई है तो सभी किसानों से बात करके ही फैसला लेंगे। - दर्शनपाल, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा