खरखौदा। शहर में सफाई के नाम से खानापूर्ति की जा रही है। शहर में ना केवल नालों की सफाई के लिए अलग से टेंडर छोड़ा जा चुका है बल्कि घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए अलग और सड़कों की सफाई के लिए अलग से टेंडर छोड़ा गया है। शहर के हालात देखकर ऐसा कतई नहीं लगता है कि शहर में सफाई का काम जिम्मेदारी के साथ हो रहा है।
पहले जहां शहर में आए दिन घर-घर से कूड़ा एकत्रित करने के लिए छोटे ट्रैक्टर-ट्राली गलियों में पहुंचा करते थे, वहीं अब कई दिन से घरों से कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है। लोगों के घरों में कूड़ा सड़ रहा है, जिम्मेदार अधिकारी इस तरफ ध्यान देने को तैयार नहीं है। एसडीएम ने नगरपालिका के अधिकारियों को सख्त हिदायत दी थी कि कूड़ा उठाने वाले वाहन पर घंटी लगवाई जाए, ताकि शहर वासियों को पता चल सके कि उनकी गली में सफाई वाले आए हैं। लेकिन अभी तक एक भी कूड़ा गाड़ी पर यह घंटी नहीं लगी है। पहले लगाए गए लाउडस्पीकर अब कूड़ा गाड़ियों से नदारद है। शहर के सार्वजनिक स्थानों व सड़क किनारे गंदगी के ढेर पड़े रहना सामान्य बात हो गई है। नगरपालिका के अधिकारी अनजान बने हुए हैं और इसका खामियाजा शहर वासी भुगत रहे हैं।
नगर पालिका के सचिव संदीप कुमार ने बताया कि ठेकेदार पर सफाई करने में कोताही बरतने के मामले में जुर्माना लगाया गया है। अगर फिर से लापरवाही दिखाई देती है तो फिर जुर्माना लगाया जाएगा।