सोनीपत। खरीफ सीजन में धान की रोपाई की शुरुआत के साथ ही जिले में डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) खाद की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
अभी तक प्रशासनिक पाबंदी के चलते किसान धान की रोपाई नहीं पा रहे थे। लेकिन अब डीएपी नहीं मिलने से रोपाई नहीं हो पा रही है। प्री मानसून आने के बाद किसान जल्द रोपाई करना चाहते हैं, लेकिन डीएपी की कमी उसमें बाधक बन रही है।
किसानों की जिले में 15 जून तक करीब 6500 मीट्रिक टन डीएपी खाद की मांग होती है, लेकिन अब तक महज 2400 मीट्रिक टन ही उपलब्ध हो पाई है। ऐसे में धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। धान की रोपाई का सीजन शुरू होने के बाद किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
पहले प्रशासन ने जल संरक्षण के मद्देनजर 15 जून तक धान की रोपाई पर रोक लगाई थी तो अब प्री-मानसून की अच्छी बारिश के बाद किसान रोपाई के लिए तैयार हुए तो डीएपी नहीं मिल पा रही है। डीएपी फसलों के बेहतर विकास के लिए आवश्यक उर्वरक है, जिसमें 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फास्फोरस होता है।
यह पौधों की जड़ों के विकास में सहायक है। मिट्टी में घुलकर पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में मदद करता है। खरीफ सीजन में विशेषकर धान, कपास, गन्ना और ज्वार जैसी फसलों के लिए इसकी मांग काफी अधिक रहती है।
रैक ब्रेक के चलते खाद की आपूर्ति बाधित : अधिकारियों के अनुसार इस बार खरीफ सीजन की शुरुआत से ही खाद रैक में बार-बार व्यवधान आ रहे हैं, जिसके कारण जिले में समय पर पर्याप्त डीएपी नहीं पहुंच पाई है।
कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जून में अकेले 3 हजार मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत होती है, लेकिन आपूर्ति काफी पीछे चल रही है।
खरीफ सीजन में धान का बड़ा लक्ष्य : जिले में खरीफ सीजन के दौरान 85 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। कृषि विभाग ने 15 हजार एकड़ में सीधी बिजाई के माध्यम से धान की बुवाई करवाने का भी लक्ष्य निर्धारित किया है।
इसके अलावा कपास, ज्वार और गन्ना जैसी अन्य फसलों की भी बड़े पैमाने पर खेती की जा रही है।
फोटो 13: सोनीपत के गांव ग्यासपुर में की गई धान की रोपाई। संवाद
फोटो 13: सोनीपत के गांव ग्यासपुर में की गई धान की रोपाई। संवाद
फोटो 13: सोनीपत के गांव ग्यासपुर में की गई धान की रोपाई। संवाद