सोनीपत। हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में गांव पांची गुजरान से बुधवार को एतिहासिक पहल की गई। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली इंटरनेशनल कार्गो टर्मिनल (डीआईसीटी) में भारत के पहले वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग एवं चार्जिंग स्टेशन का शुभारंभ किया। उनके साथ केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी भी मौजूद रहे।
शुभारंभ के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि भारत की लॉजिस्टिक लागत चीन की तुलना में लगभग दोगुनी है, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। अब इलेक्ट्रिक ट्रकिंग और बैटरी स्वैपिंग तकनीक के माध्यम से यह लागत लगभग 6 फीसदी तक घटाई जा सकेगी, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
अब देश में सड़कें पहले से कहीं तेजी से बन रही हैं। सुपरफास्ट एक्सप्रेस-वे और हरित ईंधन से भविष्य में माल ढुलाई रेलवे से भी सस्ती होगी। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में दिसंबर, 2026 तक रेट सिंगल डिजिट में लाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि भारत लॉजिस्टिक दक्षता में अग्रणी बन सके। इस दौरान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली, पूर्व सांसद रमेश कौशिक, विधायक देवेंद्र कादियान व निखिल मदान आदि मौजूद रहे।
किसान अब बनेगा ऊर्जा उत्पादक
नितिन गडकरी ने कहा कि वह खुद किसान हैं और अब किसान ऊर्जा दाता बनने जा रहा है। केंद्र सरकार बायोफ्यूल क्रांति की दिशा में तीव्र गति से काम कर रही है। पराली, मक्का, गन्ना और कचरे से अब इथेनॉल और बायोफ्यूल तैयार किया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी इथेनॉल उत्पादन से हुई है।
डीजल-पेट्रोल से मुक्ति की दिशा में ऐतिहासिक कदम
नितिन गडकरी ने कहा कि आज जिन ट्रकों का उद्घाटन हुआ है वह पूरी तरह इलेक्ट्रिक हैं और बिना प्रदूषण के चलेंगे। कुछ वर्षों में बैटरी की कीमतों में 50 से 60 फीसदी तक गिरावट आई है, जिससे ईवी अब परिवहन उद्योग के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो रहे हैं। देश में फ्लेक्सी इंजन, ईवी और बायो-फ्यूल वाहनों पर तेजी से काम चल रहा है।
महाराष्ट्र के नागपुर और जबलपुर में पराली से बनी सड़कें तैयार हो चुकी हैं और अब यह तकनीक देशभर में लागू की जाएगी। देश में 80 लाख टन कचरे का उपयोग सड़क निर्माण में किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ अपशिष्ट प्रबंधन को भी बल मिला है। जल्द ही हम जहाजों का ईंधन भी अपने देश में बनाएंगे। मेक इन इंडिया अब केवल नारा नहीं, आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ बन चुका है।
डीजल से मुक्ति अब दूर नहीं
केंद्रीय मंत्री ने ट्रांसपोर्ट कारोबारियों से अपील करते हुए कहा कि वह डीजल-पेट्रोल से जल्द मुक्ति पाएं। जो सबसे पहले इस दिशा में कदम बढ़ाएगा, उसका खर्च सबसे कम और लाभ सबसे अधिक होगा। आने वाले कुछ वर्षों में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करेगा।
फोटो 08: सोनीपत के गांव पांची गुजरान स्थित डीआईसीटी में इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग एवं चार्