फोटो 03: सोनीपत के कृषि विज्ञान केंद्र, जगदीशपुर में प्रशिक्षण शिविर के उपरांत मौजूद किसान व
सोनीपत। कृषि विज्ञान केंद्र जगदीशपुर में फसल अवशेष प्रबंधन के तहत कृषि यंत्रों का योगदान विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
मुख्य वैज्ञानिक डॉ. जेएस बामल ने बताया कि फसल अवशेष जलाना वातावरण, मृदा, स्वास्थ्य व जीव जंतुओं के लिए हानिकारक है। परियोजना समन्वयक डॉ. कुलदीप दहिया ने बताया कि मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए कृषि यंत्रों की मदद से फसल अवशेष को खेत में दबाया जा सकता है।
इससे महंगे रासायनिक उर्वरकों में होने वाले खर्च में कटौती की जा सकती है। अगर किसान पराली से अधिक आमदनी करना चाहे तो पराली को स्ट्रा बेलर की मदद से गठ्ठे बनाकर बाहर निकाल सकते हैं।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जोगेंद्र सिंह तोमर ने किसानों को समूह बनाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जागरूक किया। डॉ. संदीप ने पराली जलाने से होने वाले दुष्प्रभाव से जानकारी दी।