सोनीपत के क्षेत्रीय मशरूम अनुसंधान केंद्र, मुरथल में शिविर के समापन पर स्टाल का निरीक्षण करते
सोनीपत। जय बजरंग प्रतिष्ठान संस्था का क्षेत्रीय मशरूम अनुसंधान केंद्र, मुरथल में वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन विषय पर चल रहा सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संपन्न हो गया। इसमें मुख्य अतिथि के महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय (एमएचयू) करनाल के कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा, विशिष्ट अतिथि रजिस्ट्रार डॉ. अजय यादव, कृषि विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक जगदीश सिंह गुलिया, राजेंद्र कौशिक, डॉ. जेके श्योराण, कैप्टन विनीत कुमार रहे।
कुलपति ने कहा कि किसानों को परंपरागत खेती को अलविदा कहकर भविष्य की खेती के बारे में सोचना चाहिए। समय की मांग है कि किसान जितनी तेजी से बागवानी की खेती करेगा, उसे उतना ही फायदा होगा। बागवानी खेती में न केवल फल, सब्जियां, फूलों की खेती आती है, बल्कि मधुमक्खी पालन, मशरूम, मसालों व औषधीय पौधों की खेती भी शामिल है।
कुलपति ने बताया कि किसान खेतीबाड़ी के साथ मधुमक्खी पालन कर अतिरिक्त आय कर सकते हैं। इसके लिए किसानों, युवाओं, महिलाओं को प्रशिक्षण लेना चाहिए। किसान मधुमक्खी पालन के विषय में हर जानकारी सीख सकते हैं, जो उनके लिए बहुत उपयोगी साबित होगी।
मधुमक्खी पालन को बागवानी में वैज्ञानिक रूप से अपनाने के लिए, मधुमक्खी पालन के आधुनिक तरीकों को समझना होगा। उन्हें अपनी बागवानी प्रथाओं में एकीकृत करना होगा।