संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन यह तय है कि तीनों कृषि कानून रद्द होने तक किसान घर वापसी नहीं करेंगे। किसान केंद्र सरकार की शर्तों पर बातचीत नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि किसान मोर्चा के सभी 40 नेता उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए तैयार रहें। इन राज्यों में भाजपा की सरकारों का पुरजोर विरोध कर उन्हें सत्ता से बाहर किया जाएगा।
वह शनिवार को कुंडली बॉर्डर के धरने पर पहुंचे थे। धरनास्थल पर आंतिल खाप व किसानों ने उनकी अगुवाई की। कुंडली में जारी आंदोलन स्थल पर राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार कितना भी षड्यंत्र करे, किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने मंच से केंद्रीय कृषि मंत्री को जवाब दिया कि बातचीत के लिए किसान भी तैयार हैं, लेकिन शर्तें सरकार की नहीं चलेंगी। कृषि कानूनों को हर हाल में रद्द करना होगा। जब तक यह काले कानून रद्द नहीं होंगे, किसान धरनास्थलों पर डटे रहेंगे।
मानसून सत्र के दौरान रोज 200 किसान संसद के बाहर करेंगे प्रदर्शन
राकेश टिकैत ने दोहराया कि 22 जुलाई से संसद के मानसून सत्र के दौरान रोज 200 किसान धरनास्थलों से संसद पहुंचेंगे और वहां पर प्रदर्शन करेंगे। यह किसान बसों या कारों से संसद तक जाएंगे। इस दौरान ट्रैक्टरों का इस्तेमाल नहीं होगा। राकेश टिकैत ने हरियाणा सरकार के मंत्रियों को बड़बोले करार दिया। उन्होंने कहा कि यहां के मंत्री कुछ ज्यादा ही बोलते हैं। अब कहां हैं यह मंत्री, हिम्मत है तो सामने आकर बोलें। उन्होंने कहा कि पंजाब के नेता सुखबीर सिंह बादल ठीक कह रहे हैं। सरकार अब कुछ दिन की ही मेहमान है।
गर्मी के कारण कम पहुंच रहे लोग, सर्दी में फिर जुटेगी भीड़
राकेश टिकैत ने धरनास्थलों पर भीड़ कम होने पर कहा कि फिलहाल गर्मी ज्यादा है। ठंड शुरू होते ही धरनास्थलों पर किसानों की भीड़ पहले की तरह हो जाएगी और ठंड में ही सरकार का इलाज किया जाएगा। उन्होंने तंज कसा कि सरकार वैक्सीन की दो डोज दे रही है, लेकिन किसान सरकार को दवाई की तीन डोज देंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसान संगठनों के एक होने का असर यह हुआ कि देशभर में किसान एक हो गए। हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के किसान संगठन एक होकर लड़ाई में कूद पड़े हैं। ऐसे में किसानों की जीत निश्चित है।