सोनीपत। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को रद्द कराने को लेकर 15 दिनों से कुंडली बॉर्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन में शुक्रवार को मतभेद दिखाई दिए। रेल रोकने से लेकर निजी कंपनी के मार्ट के बाहर किए जा रहे प्रदर्शन पर अलग-अलग राय दिखी। हालांकि किसान नेताओं का कहना है कि आंदोलन में कोई बिखराव नहीं है और एकजुट होकर सभी जत्थेबंदी आगे बढ़ रहे हैं।
वीरवार को किसान नेता बूटा सिंह बुर्जगिल, डॉ. दर्शनपाल सिंह और बलबीर सिंह राजेवाल ने पत्रकारों से कहा था कि वह दिल्ली के दूसरे हाईवे जयपुर-दिल्ली को रोकेंगे व रेलवे ट्रैक भी जाम कर सकते हैं। इसके लिए रूपरेखा बनेगी, इसके बाद फैसला होगा। उन्होंने यह भी कहा था कि पंजाब में पहले ही रेलवे पार्कों में उनका धरना चल रहा है और अगर किसान इस बार रेलवे ट्रैक पर बैठा तो समाधान होने तक नहीं हटेगा। इसे लेकर शुक्रवार को किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने साफ इंकार करते हुए कहा कि रेल रोकने का उनका एजेंडा कभी था ही नहीं। हालांकि एक दिन पहले उनके सामने डॉ. दर्शनपाल ने यह बात रखी थी। हालांकि उन्होंने भी यही कहा था कि जरूरत पड़ी तो ऐसा हो सकता है।
वहीं सोनीपत में निजी कंपनी के मार्ट के बाहर दो दिन से धरना दे रहे किसानों को लेकर भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने शुक्रवार को कहा कि यह उनका एजेंडा नहीं है। जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उनका बॉर्डर के आंदोलन से कोई वास्ता नहीं है और न ही उन्होंने कोई कॉल इस तरह की है। हालांकि किसान नेता राजेवाल ने कहा कि 14 को भाजपा नेताओं, डीसी कार्यालय के साथ निजी कंपनी के मार्ट पर भी प्रदर्शन करेंगे। ऐसे में इसे लेकर भी अलग-अलग मत हो गए हैं। किसानों ने इस आंदोलन का केंद्र कुंडली बॉर्डर बना हुआ है। ऐसे में अगर यहां से कोई गलत संदेश या अलग-अलग मत जाता है, तो यह आंदोलन के लिए हितकर नहीं माना जा सकता है।