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संसद कूच रद्द करने पर किसान संगठनों में कलह बढ़ी, हरियाणा समेत पंजाब के कई संगठन विरोध में उतरे

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सोनीपत। संसद मार्च को रद्द करने से किसान संगठनों में कलह बढ़ती जा रही है। हरियाणा के साथ ही पंजाब के संगठन भी संयुक्त किसान मोर्चा के इस फैसले के विरोध में उतर गए हैं। हरियाणा के कई संगठनों के नेताओं ने बैठक करके संसद मार्च को सरकार पर दबाव बनाने के लिए जरूरी बताया और इसपर दोबारा से विचार करने के लिए कहा गया है। इस तरह ही पंजाब के संगठन भी खुलकर सामने आने लगे हैं और इस तरह बार-बार संसद मार्च रद्द करने से किसान संगठनों के फैसलों को लेकर किसानों में अविश्वास की भावना पैदा होने की बात कही है। इसलिए संयुक्त किसान मोर्चा को दोबारा बैठक करके संसद मार्च का एलान करने की सलाह दी गई है और इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। उसके बाद आगे का फैसला लेने की बात कही गई है।
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कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर किसान पिछले साढ़े चार महीने से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। किसानों व सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत जरूर हुई, लेकिन उनमें कोई हल नहीं निकलने के बाद से सरकार व किसानों के बीच बातचीत बंद पड़ी है। इसको देखते हुए ही मई के पहले पंद्रह दिन में संसद तक पैदल मार्च का एलान संयुक्त किसान मोर्चा ने किया था। लेकिन, अब अचानक संसद मार्च को रद्द करने की घोषणा की गई, जिसको लेकर किसान संगठनों में कलह बढ़ती जा रही है। जहां पहले हरियाणा व यूपी के संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई थी और इसको लेकर खींचतान हो गई थी। वहीं अब संसद मार्च को लेकर शुरू हुई कलह खुलकर सामने आ गई है और हरियाणा के साथ ही पंजाब के संगठन भी संसद मार्च रद्द करने के विरोध में उतर गए हैं।
किसान मजदूर संघर्ष समिति पंजाब के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू ने कहा कि आंदोलन को लेकर कोई भी एलान सोच समझकर करना चाहिए और कोई एलान किया गया है तो उसको पूरा करना चाहिए। जिस तरह से पहले संसद मार्च का एलान किया गया था और उसे रद्द कर दिया गया था। उस तरह ही अब मई के पहले पंद्रह दिन में संसद मार्च करने का एलान किया था और उसे अचानक रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले किसान संगठनों के लिए ठीक नहीं रहेंगे और किसानों में ऐसे फैसलों से अविश्वास पैदा होगा। उन्होंने कहा कि संसद कूच के एलान को अमलीजामा पहनाया जाना चाहिए। अब केवल यह रणनीति बनाई जानी चाहिए कि संसद कूच करके किसानों को वहां बैठना है या वहां से वापस आना है।
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सतनाम सिंह पन्नू ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा को एक सप्ताह के अंदर इसपर फैसला लेना चाहिए। वहीं हरियाणा के किसान संगठनों की संसद मार्च रद्द करने को लेकर बैठक हुई और इसका विरोध जताया गया। जिसमें किसान नेताओं ने कहा कि जिस तरह से सरकार का रुख है, उसको देखते हुए सरकार पर दबाव बनाने के लिए संसद मार्च करना जरूरी है। भाकियू हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि जिस तरह से आंदोलन चल रहा है, उसमें संसद मार्च जरूरी है। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा को इसपर फैसला लेना है, लेकिन इस समय किसानों के साथ ही आम लोग यही चाहते हैं कि संसद मार्च हो।
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