सोनीपत। कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर किसान संगठनों के नेता सोमवार को सांकेतिक अनशन करेंगे। वहीं भाजपा नेताओं के घरों के बाहर व जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा तो जिलों में डीसी को किसान ज्ञापन देंगे। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार पांच संशोधन व एमएसपी गारंटी के लिए तैयार है, लेकिन हमें कानून रद्द चाहिए। अब सरकार कोई नया प्रस्ताव देती है तो उसपर बातचीत होगी और सरकार से बातचीत का रास्ता खुला हुआ है। यह भी साफ कर दिया कि अगर आंदोलन में शरारती तत्व व देश विरोधी घुसे है तो खुफिया एजेंसी उनको गिरफ्तार करें।
किसान नेता शिवकुमार कक्का, राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी व बूटा सिंह बुर्जगिल ने कहा कि आंदोलन की अगली रणनीति का एलान 14 दिसंबर को बैठक करने के बाद शाम को किया जाएगा। अभी तक दो आंदोलन तय किए गए थे। इनमें एक पूरा हो चुका है और दूसरा सोमवार को होगा। इसके बाद किसान जत्थेबंदियां बैठक करके दिल्ली पर दबाव बढ़ाने की अगली रणनीति तय करेगी। कहा कि सभी एकजुट रहे, उसके लिए समिति के बीच चर्चा किए बिना कोई निजी बयान नहीं देगा। उन्होंने कहा कि वाहनों के कागज पूरे होने के बाद भी किसानों को यहां आने से रोका जा रहा है और इस साजिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। किसान नेताओं ने कहा कि जिस तरह से किसान बढ़ रहे हैं, उससे जिम्मेदारी भी बढ़ी है। किसान आंदोलन को लेकर ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है, जिससे कोई शरारती तत्व गड़बड़ी नहीं कर सके। भारतीय किसान मजदूर नौजवान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र आर्य दादूपुर ने कहा कि सरकार बार-बार कह रही है कि आंदोलन में असामाजिक तत्व घुस गए हैं। अगर सरकार को पता है तो उनको गिरफ्तार कराए। ऐसा करने पर किसान भी पुलिस का सहयोग करेंगे।
राकेश टिकैत बोले, प्रतिबंधित संगठनों के लोगों को पकड़कर जेल में डालो
भाकियू यूपी के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि गाजियाबाद बॉर्डर पर कुछ गलत लोग पोस्टर लेकर आंदोलन में शामिल हुए थे। उनको हटाया गया और ऐसे लोगों पर आगे भी नजर रखी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर आंदोलन में देश विरोधी घुसे हैं और खुफिया एजेंसियों को उनके बारे में जानकारी मिल गई है तो उनको पकड़ना चाहिए। अगर प्रतिबंधित संगठनों के लोग हमारे बीच घूम रहे हैं तो उनको पकड़कर जेल में डाल देना चाहिए। वहीं राकेश टिकैत ने सरकार की चुटकी लेते हुए कहा कि अब सरकार को गोला-लाठी लगाई जाएगी। उसके बाद ही सरकार को किसानों की परेशानी समझ में आएगी।