सोनीपत। कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए आंदोलन कर रहे किसानों ने किसी भी हालत में बीच का रास्ता अपनाने से साफ इंकार कर दिया है। किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार उनको गुमराह कर रही है और अब सड़कों के साथ ही देशभर में रेलवे ट्रैक जाम किए जाएंगे। इस बार किसान ट्रैक और सड़क से तब तक नहीं उठेगा, जब तक कानून वापस नहीं होंगे। रेलवे ट्रैक जाम करने की तारीख का एलान केंद्रीय समिति जल्द ही करेगी।
किसान संगठनों के प्रतिनिधि बूटा सिंह बुर्जगिल, दर्शनपाल सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल समेत अन्य ने केंद्रीय कृषि मंत्री की पत्रकार वार्ता में उठाए गए मुद्दों पर कहा कि आज केंद्र सरकार ने सभी के सामने स्वीकार कर लिया है कि कृषि कानून सही नहीं है। उन्होंने कहा कि जब मंत्री कह रहे हैं कि यह राज्यों का मामला है तो केंद्र ने कृषि कानून क्यों बनाए है। वहीं कोरोना महामारी के बीच में इस तरह के कानून किसानों की मांग के बिना बनाए जाने पर केंद्र सरकार की मंशा को साफ दर्शाता है। इसके अलावा भी कानून में काफी कुछ ऐसा है, जिससे साफ होता है कि वह किसानों के लिए नहीं, बल्कि कारपोरेट के लिए ज्यादा है। ऐसे में किसानों को वार्ता और सुधार के नाम पर गुमराह किया जा रहा है।
कहा कि केंद्र सरकार को जवाब देना चाहिए कि वह दोगली नीति क्यों अपना रही है। उन्होंने कहा कि बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया गया है, लेकिन अब वह कृषि कानूनों को रद्द करने वाले ड्राफ्ट के बिना वार्ता के लिए नहीं जाएंगे। क्योंकि हर बार वार्ता में केवल उनको नहीं बोलना पड़ता है। किसान नेता बूटा सिंह बुर्जगिल ने कहा कि उस ड्राफ्ट में केंद्र सरकार ने यह भी झूठ लिखकर दिया है कि जमीन कुर्की का कोई प्रावधान नहीं है। जबकि इस कानून में 14/7 पर लिखा हुआ कि जमीन कुर्की करने का हक कंपनी को होगा। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार अब अहंकार को कायम रखने का मुद्दा बना रही है। इस अहंकार के चलते किसान की अनदेखी हो रही है।
14 को देशभर में जिला मुख्यालयों पर ंहोगा प्रदर्शन
उन्होंने कहा कि अपनी पहली घोषणा के अनुसार 12 दिसंबर को टोल फ्री किए जाएंगे तो जयपुर हाईवे जाम किया जाएगा। इस तरह 14 को देशभर में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन होगा और डीसी के नाम ज्ञापन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को 10 दिसंबर तक का दिया गया अल्टीमेटम खत्म हो गया है। यह आंदोलन अब सड़क के साथ रेल ट्रैक पर भी चलेगा और देश में जिस तरह से धरने चल रहे है, वह ऐसे ही चलते रहेंगे। उनके अलावा रेलवे ट्रैक जाम किए जाएंगे। किसान नेताओं ने कहा कि उनके संगठनों में किसी तरह की फूट नहीं है। सब एकजुट हैं और किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को मंच सांझा नहीं करने देंगे।