सोनीपत। कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर कुंडली बॉर्डर पर किसानों का धरना जारी है। इस दौरान धरनास्थल पर नए-नए रंग देखने को मिल रहे हैं। जहां हरियाणा के किसान बढ़ने लगे तो वहां हुक्का-पानी बैठक बना दी गई और वहां से गुजरने वाले हरियाणा के किसान हुक्का गुड़गुड़ाने के बाद के बाद आगे जाते हैं। इस तरह ही पंजाब-हरियाणा भाईचारा लंगर चला दिया गया तो आंदोलन में राशन लेकर आने वालों पर फूल बरसाए जा रहे हैं। धरनास्थल पर लंगरों में नूडल्स व गोल गप्पे तक खिलाए जा रहे हैं तो मौसम के अनुसार जलेबी पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
ट्रैक्टर परेड के बाद किसानों ने कुंडली बॉर्डर पर दोबारा पहुंचना शुरू किया तो उनमें हरियाणा के किसान ज्यादा दिखने लगे। जिसके बाद अधिकतर टेंट में हरियाणा की पहचान हुक्का दिखाई देने लगा है। ऐसे में दहिया खाप ने टेंट लगाकर हुक्का-पानी बैठक ही बना दी। जहां दहिया खाप के लोग आंदोलन को लेकर चर्चा करते हैं। इसके साथ ही वहां से निकलने वाले हरियाणा के किसान भी रुकते है और वहां बैठकर हुक्का गुड़गुड़ाते है।
पंजाब-हरियाणा भाईचारा का साझा लंगर शुरू किया, फूल भी बरसाए जा रहे
कुंडली बार्डर पर अब किसानों ने एक साझा लंगर शुरू किया है, जिसे पंजाब हरियाणा भाईचारा लंगर का नाम दिया गया है। इस लंगर में रोजाना अलग-अलग पकवान किसानों के लिए तैयार किए जा रहे हैं। इससे भी आगे बढ़ते हुए किसानों ने उन लोगों का सत्कार करने का निर्णय लिया है जो धरनारत किसानों के लिए राशन व अन्य सामग्री पहुंचा रहे हैं। कुंडली धरनास्थल पर रविवार को उन वाहनों पर पुष्पवर्षा की गई, जिसमें किसानों के लिए सामग्री पहुंची थी। यहां पर जमा दहिया खाप, आंतिल खाप के सदस्यों ने पंजाब के किसानों के साथ साझा लंगर शुरू कर किसानों की खूब सेवा की। किसानों ने कहा कि सरकार के खिलाफ अब जनाक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
नूडल्स, गोलगप्पे, पापड़ी का लंगर भी लगाया
धरनास्थल पर किसानों के खानपान की नई-नई व्यवस्था लोग कर रहे है। वहां नूडल्स, गोलगप्पे, पापड़ी आदि का लंगर लगाया गया है। उस लंगर को शुरू करने वाले पहले भी कई बार लंगर लगा चुके है और वह हर बार नई खाद्य सामग्री का लंगर लगाते है। वह मक्का की रोटी व साग का लंगर भी लगा चुके है तो पिज्जा का लंगर भी लगाया था। उनका मानना है कि किसान एक तरह का खाना खाकर ऊब जाते है और ऐसे में मानसिक रूप से परेशान रहने लगते है। जब किसानों को नया-नया खाने को मिलेगा तो वह खुश रहेंगे और आंदोलन में बढ़ चढक़र हिस्सा लेंगे। वहां खाने का टेस्ट बदलने के लिए किसान चाट पकौड़ी का लुत्फ ले रहे है।
दूध के टैंकरों में पानी लेकर पहुंच रहे किसान
गाजीपुर बॉर्डर पर जब बिजली व पानी बंद किया गया तो उसके बाद कुंडली बॉर्डर पर भी किसान खुद पानी की व्यवस्था करने लगे हैं। वहां पानी के लिए भी सेवा होने लगी है और दूध के टैंकर में किसानों के लिए पानी लेकर आ रहे है। वहां रोजाना कई टैंकर पानी लाया जाता है, जिससे किसानों को पानी के लिए परेशानी नहीं होना पड़े। उन टैंकर से पानी लेने की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए टंकी लगवाई गई है।
किसानों को समर्थन देने पंजाब से पहुंचे वकील
देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग कुंडली बॉर्डर पर किसानों का समर्थन करने के लिए पहुंच रहे हैं। वहां रविवार को पंजाब के मलेरकोटला कोर्ट से वकील पहुंचे। किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए वकीलों ने कहा कि दिल्ली, हरियाणा या अन्य किसी राज्य की कोर्ट हो, वह किसानों के मुकदमे बिना फीस के लड़ेंगे। वकीलों ने कहा कि 26 जनवरी के बाद बड़ी संख्या में किसानों पर गलत तरीके से मुकदमे भी दर्ज किए जा रहे हैं और नाजायज रूप से किसानों को जेलों में बंद किया गया है। ऐसे में किसानों को हर तरह की कानूनी सलाह व मदद दी जाएगी।
लंगर में अब ढाबों की तरह कुर्सी-मेज की व्यवस्था की गई
कुंडली बॉर्डर पर जगह-जगह पर लंगर लगाए हैं। अधिकतर लंगरों में कतार में बैठकर लंगर चखा जाता है। एक लंगर ऐसा भी है जिसका नाम सिख ढाबा रखा गया है। इसमें कुर्सी और मेज की व्यवस्था भी की गई है। इस लंगर के संचालक ने बताया कि बड़ी संख्या में बुजुर्ग किसान भी आए हैं जो जमीन पर अच्छी तरह से बैठकर खाना नहीं खा सकते उन्हें बैठने में दिक्कत होती है। उनके लिए कुर्सी-मेज की सुविधा कर दी गई है।