कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए चल रहे आंदोलन को धार देने के लिए किसान नेताओं की अब युवा वर्ग पर नजर है। किसान आंदोलन में इस समय युवाओं की भागीदारी काफी कम है। युवाओं को आंदोलन से जोड़ने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके साथ ही लक्खा सिधाना समेत उन सभी की मदद लेनी शुरू कर दी गई है, जिनके सहारे आंदोलन से युवा जुड़ सकते हैं।
किसान पिछले चार माह से दिल्ली बॉर्डर पर डटे हैं। लगातार मौत होने के बाद भी सरकार किसानों की सुध लेने को तैयार नहीं है। ऐसे में किसानों को कड़े फैसले लेने पड़ रहे हैं। हम नहीं चाहते कि किसी तरह का तनाव और बवाल हो। हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि संसद कूच भी शांतिपूर्ण तरीके से होगा। अन्य कार्यक्रम भी शांति के साथ किए जाएंगे। इसके लिए युवाओं से खासतौर पर अपील की गई है। - गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष, भाकियू हरियाणा