संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने यूपी के लखीमपुर खीरी की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री, उनके बेटे और उनके लोगों पर तुरंत हत्या के मुकदमे दर्ज करने व मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की है। एसकेएम ने यूपी के भाजपा नेताओं को राज्य के किसानों को ललकारने से रोकने की भी चेतावनी दी है।
संयुक्त किसान मोर्चा की समन्वय समिति ने लखीमपुर खीरी की घटना के तुरंत बाद कुंडली बॉर्डर पर आपात बैठक बुलाई। बैठक के बाद एसकेएम के वरिष्ठ नेता डॉ. दर्शनपाल ने बताया कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री द्वारा एक जनसभा में किसान नेताओं के खिलाफ जारी खुली धमकी के विरोध में रविवार सुबह से ही बड़ी संख्या में किसान काला झंडा दिखाने के लिए तिकुनिया हेलीपैड पर जुटना शुरू हो गए थे।
भाजपा नेताओं को लोकतांत्रिक तरीके से किया विरोध बर्दास्त नहीं हुआ। किसानों पर एक क्रूर और अमानवीय हमले में भाजपा के केंद्रीय गृह राज्य मंत्री, उनके बेटे, उनके चाचा और अन्य से जुड़े वाहनों का काफिला कई प्रदर्शनकारियों को कुचल गया। एसकेएम ने कहा कि बताया जा रहा है कि एक किसान की गोली मारकर हत्या कर दी।
इस घटना में कई किसानों की भी मौत हो गई और कई गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी है कि तराई किसान संगठन व एसकेएम नेता तजिंदर सिंह विर्क भी घायल हैं। इस क्रूर हमले के बाद किसानों को जवाबी कार्रवाई के लिए उकसाया भी गया और भाजपा नेता के वाहनों को तोड़ दिया गया।
संयुक्त किसान मोर्चा की मांग है कि उत्तर प्रदेश सरकार अजय मिश्रा टेनी की तरफ से शामिल सभी लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा तुरंत दर्ज करे। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री को तुरंत बर्खास्त किया जाए।
इस बीच कुंडली बॉर्डर के अलावा अनेक एसकेएम नेता अलग-अलग जगहों से लखीमपुर खीरी के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं योगेंद्र यादव ने कहा कि मामले की पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश से कराई जाए।
जांच यूपी से बाहर ही कराई जाए। इसके साथ ही उन्होंने सोमवार सुबह 10 बजे से एक बजे तक डीसी कार्यालय के बाहर धरना देकर मांगपत्र सौंपने को कहा है।
एसकेएम ने कहा- सीएम मनोहर लाल के इरादे अस्वीकार्य
एसकेएम नेता डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि एक पूरी तरह से अस्वीकार्य घटनाक्रम में हरियाणा के सीएम मुख्यमंत्री मनोहर लाल को एक वीडियो क्लिप में कार्यकर्ताओं को लठ उठाने और किसानों पर हमला करने की बात सामने आ रही है। यह स्पष्ट हो गया कि आयुष सिन्हा जैसे अधिकारियों को यह छूट कहां से मिलती है।
जबकि किसान आंदोलन ने शांति और अहिंसा को अपना मूल बना लिया है। एसकेएम भाजपा के मुख्यमंत्री के हिंसक इरादे की कड़ी निंदा करता है और मांग करता है कि वह तुरंत माफी मांगे और अपने संवैधानिक पद से इस्तीफा दें।