खेतों में छाया घना कोहरा। संवाद
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सोनीपत/गोहाना। कुछ दिनों से लगातार गिर रहे तापमान और पड़ रहे घने कोहरे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। उनको डर सता रहा है कि कहीं फसल को पाला न मार जाए। दूसरी ओर कृषि विशेषज्ञ उनको सलाह दे रहे हैं कि फसलों की हल्की सिंचाई जरूर करते रहें। इससे तापमान के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है।
पाला पड़ने से गेहूं की पत्तियों पर जमी ओस की बूंदें फसल को नुकसान पहुंचाती हैं। इससे पौधे की कोशिकाएं फट जाती हैं। पत्तियां झुलस जाती हैं। पौधों की वृद्धि रुक जाती है। दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। अधिक पाला पड़ने पर पैदावार में करीब 20 से 40 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। छिछड़ाना के किसान भगत सिंह, रणवीर सिंह, बरोदा के जितेंद्र, पालेराम, सतीश और सज्जन कुमार का कहना है कि कुछ दिनों में जिस हिसाब से ठंड बढ़ी है वह फसलों के जरूरी थी। हालांकि, अब यही चिंता का कारण बनती जा रही है। अगर तापमान इसी तरह गिरता रहा और पाला पड़ता रहा तो फसल को नुकासन हो सकता है।
ये है विभिन्न फसलों का रकबा : कृषि उपनिदेशक डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि जिले में इस बार डेढ़ लाख हेक्टेयर में गेहूं, करीब 4 हजार हेक्टेयर में सरसों, 12 हजार हेक्टेयर में विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती की गई है। हालांकि, पहले सरसों की बिजाई का रकबा ज्यादा होता था लेकिन इस बार कुछ कम हुआ है। रकबा घटने के पीछे के कारण पर उनका कहना है कि इस बार सीजन की शुरुआत में बारिश हो जाने के चलते सरसों की बिजाई में पछेती हो गई।
अभी तक फसल पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं : कृषि विभाग के गोहाना एसडीओ राजेंद्र मेहरा की माने तो कोहरे से फसल को कोई नुकसान नहीं होता। अभी तक मौसम में जो बदलाव है। उसका फसल पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं है। पाला गेहूं के लिए सही है। सरसों या सब्जी आदि चौड़े पत्ते वाली फसलों को पाले से बचाने के लिए हल्की सिंचाई जरूर करते रहें।