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मॉक ड्रिल : युद्ध से पहले हम कितने तैयार...

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फोटो 33- सोनीपत के लघु सचिवालय में मॉक ड्रिल के दौरान घायल को उपचार के लिए ले जाते पुलिस कर्मी।
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सोनीपत। लघु सचिवालय परिसर में जैसे ही सायरन बजा, अफरा-तफरी का दृश्य बन गया। लोगों को पता लगा कि मिसाइल से हमला किया गया है। जिसके बाद आवाज आने लगी उसे बचाओ। उसकी हालत गंभीर है। तुरंत एंबुलेंस बुलाओ। हर तरफ बचाव अभियान शुरू कर अधिकारियों व कर्मियों को सेफ हाउस (सरल केंद्र) में पहुंचाया गया। जांच अभियान के तहत घायलों को प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल भेजा गया।
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बुधवार शाम को सचिवालय परिसर में मिसाइल हमले के बाद आग लगने की सूचना पर फायर ब्रिगेड ने तत्परता से उसे नियंत्रित किया। उपायुक्त ने मौके पर स्वयं राहत कार्यों की निगरानी की। पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशामक सेवा, नागरिक सुरक्षा सहित सभी विभागों के सहयोग को सराहा। ऑपरेशन अभ्यास के तहत प्रशासन ने चार स्थानों पर मॉक ड्रिल कर आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन व सुरक्षा तंत्र ने तैयारियों को परखा। शहर के चार स्थानों सहित तीन उपमंडलों में भी एक साथ मॉक ड्रिल करवाई गई। उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार के नेतृत्व में अभ्यास कर आपदा प्रबंधन से बचाव की तैयारियों, तंत्र की सक्रियता व आमजन को सतर्कता के प्रति जागरूक किया गया। हालांकि, मॉक ड्रिल में कुछ खामियां भी नजर आईं, जिन्हें उपायुक्त ने जल्द दूर करने के निर्देश दिए।
उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि मॉक ड्रिल लघु सचिवालय, कच्चे क्वार्टर, रेलवे स्टेशन, अशोका विश्वविद्यालय के अलावा गोहाना, गन्नौर व खरखौदा में सफलतापूर्वक की गई। मॉक ड्रिल के दौरान डीसीपी कुशल सिंह, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभय सिंह जांगड़ा, नगराधीश डॉ. अनमोल, रेलवे स्टेशन पर एसडीएम सुभाष चंद्र, अशोका विश्वविद्यालय में एमडी अमित कुमार, गोहाना में एसडीएम अंजली श्रोत्रिय, खरखौदा में एसडीएम डॉ. निर्मल नागर, गन्नौर में प्रवेश कादियान सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।
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अस्पतालों की छतों पर बनाए प्लस के चिह्न
संभावित आपात या युद्ध जैसी स्थिति को देखते हुए जिले के कई अस्पतालों की छतों पर लाल रंग के प्लस (+) के चिह्न बनाए गए हैं। यह चिह्न अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों के तहत संकेत देते हैं कि संबंधित भवन चिकित्सा कार्य के लिए उपयोग में है। इन पर हमला वर्जित होता है। उपायुक्त ने बताया कि यह कदम सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत उठाया गया है, ताकि युद्ध या हवाई हमले की स्थिति में अस्पतालों की पहचान हो सके। मरीजों व स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

10 मिनट ब्लैकआउट रख दिया सहयोग
ऑपरेशन अभ्यास के तहत मॉक ड्रिल के बाद जिलावासियों ने ब्लैकआउट में भी पूरा सहयोग दिया। लोगों ने 7:50 से 8:00 बजे तक घरों व दुकानों व इमारतों की बिजली बंद कर एकता दिखाई। हालांकि ब्लैकआउट के लिए सरकारी व निजी अस्पतालों को छूट प्रदान की गई थी।

फोटो 33- सोनीपत के लघु सचिवालय में मॉक ड्रिल के दौरान घायल को उपचार के लिए ले जाते पुलिस कर्मी।

फोटो 33- सोनीपत के लघु सचिवालय में मॉक ड्रिल के दौरान घायल को उपचार के लिए ले जाते पुलिस कर्मी।

फोटो 33- सोनीपत के लघु सचिवालय में मॉक ड्रिल के दौरान घायल को उपचार के लिए ले जाते पुलिस कर्मी।

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