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बंगाल के चुनाव परिणाम पर टिका है किसान आंदोलन का भविष्य

Wed, 17 Mar 2021 02:11 PM IST
रोहतक ब्यूरो अंकित चौहान, सोनीपत
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किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
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सरकार व किसानों के बीच भले ही गतिरोध बढ़ता जा रहा हो और इस कारण करीब 52 दिन से बातचीत का रास्ता भी बंद पड़ा हो। दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन लगातार जारी है और अब यह आंदोलन बंगाल के चुनाव परिणाम पर टिक गया है। बंगाल में भाजपा को नुकसान होता है तो किसान नेताओं को सरकार से बातचीत का रास्ता खुलने की पूरी उम्मीद है। इसलिए ही संयुक्त किसान मोर्चा ने बंगाल में भाजपा के खिलाफ अंदरूनी अभियान भी छेड़ दिया है। जिसके तहत उन विधानसभा में जाने की किसान नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जहां भाजपा टक्कर में नजर आती है। वहां भाजपा की खिलाफत शुरू कर दी गई है। इस तरह अब संयुक्त किसान मोर्चा भी बैठक व पंचायतों की जगह अंदरूनी विरोध शुरू करके पूरा राजनीतिक दांव चल रहा है।

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कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर 110 दिन से किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हुए हैं। इस बीच किसानों व सरकार में 11 दौर की बातचीत हो चुकी है तो गृहमंत्री अमित शाह के साथ भी किसानों की वार्ता हुई। इसके बावजूद कोई हल अभी तक नहीं निकल सका है, लेकिन पहले सरकार व किसानों के बीच बैठक का दौर लगातार जारी था। किसानों व सरकार के बीच आखिरी बैठक 22 जनवरी को हुई थी और उसके बाद से बातचीत का रास्ता बंद पड़ा है। पहले सरकार चाहती थी कि किसान बातचीत के लिए खुद पहल करें तो किसान भी सरकार से पहले की तरह प्रस्ताव की उम्मीद रखे हुए थे।

इस तरह आंदोलन लंबा खिंचता जा रहा है और सरकार का रुख देखते हुए यह साफ हो रहा है कि वह बातचीत करने के लिए कोई पहल नहीं करेगी। इसलिए ही किसान नेताओं ने आंदोलन के तहत जहां देशभर के लिए कार्यक्रम तय किए हुए है, वहीं किसान नेता भाजपा का विरोध करने के लिए बंगाल व अन्य चुनावी राज्यों में पहुंच रहे है। जिस तरह से भाजपा सबसे ज्यादा बंगाल पर फोकस कर रही है तो उस तरह ही संयुक्त किसान मोर्चा भी वहां ज्यादा ध्यान दे रहा है। हालांकि किसान नेता अभी तक बंगाल में बैठक, पंचायत करने के साथ ही वाहन रैली निकाल रहे थे।
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अब किसान नेताओं ने अंदरूनी तौर पर भी भाजपा का विरोध करने के लिए अभियान शुरू कर दिया है। जिसमें वह अधिकतर विधानसभा क्षेत्र में जाएंगे और वहां के उन लोगों से संपर्क किया जाएगा, जिनकी क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। उनके सहारे ही लोगों से भाजपा के विरोध में वोट करने की अपील की जाएगी। किसान नेताओं को लगता है कि अगर किसान आंदोलन के बीच बंगाल में भाजपा की जीत होती है तो उनके लिए परेशानी खड़ी हो सकती है। क्योंकि पहले ही बातचीत का रास्ता बंद कर चुकी सरकार आगे किसी भी हालत में बात नहीं करेगी। इसलिए बंगाल का चुनाव परिणाम ही किसान आंदोलन के लिए सबसे अहम साबित हो सकता है।

जिन राज्यों में चुनाव है, वहां किसान नेता लगातार जा रहे हैं और वहां लोगों से भाजपा के विरोध में वोट करने की अपील की जा रही है। वहां ऐसे ही नहीं, बल्कि किसानों व आम लोगों को बताया जा रहा है कि कृषि कानून किस तरह से उन सभी के लिए नुकसानदायक है। उसके साथ ही उनको समझाया जा रहा है कि भाजपा के हारने पर ही सरकार किसानों से बातचीत करने के लिए तैयार होगी। बंगाल में अधिकतर विधानसभा क्षेत्रों में किसान नेता जाएंगे और उसके लिए जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है।
गुरनाम सिंह चढूनी, सदस्य, संयुक्त, किसान मोर्चा

बंगाल में हम खुलकर भाजपा का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि वह किसान विरोधी है। अगर सरकार किसानों के हित के फैसले लेती है तो हम उसका समर्थन भी करेंगे। इसलिए ही किसान बंगाल में भाजपा को वोट नहीं देने की अपील कर रहे है। भाजपा बंगाल में हारती है तो उसे किसानों की ताकत का अहसास जरूर होगा और उसे दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों की याद जरूर आएगी।

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अभिमन्यु कुहाड़, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा

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