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जिस प्रस्ताव को पहले नामंजूर कर चुके, उस पर बातचीत नहीं करेंगे किसान, नया प्रस्ताव भेजे सरकार

Fri, 26 Feb 2021 12:07 AM IST
रोहतक ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, सोनीपत
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कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर - फोटो : एएनआई
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सरकार और किसानों के बीच पिछले एक महीने से ज्यादा से बंद बातचीत के रास्ते को खोलने के लिए खूब कोशिश हो रही है। इस बीच कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने पुराने प्रस्ताव पर बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही तो किसान नेताओं ने साफ कर दिया कि जिस प्रस्ताव को वह पहले नामंजूर कर चुके हैं, उस पर बातचीत करने का कोई मतलब ही नहीं होता है। अगर सरकार नया प्रस्ताव भेजती है तो किसान संगठन बातचीत के लिए तैयार है।

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इसके साथ ही किसान नेताओं ने साफ किया कि वह कभी बातचीत का रास्ता बंद करने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन सरकार ही बातचीत नहीं करना चाहती है और इसलिए ही बात नहीं हो रही है। कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों व सरकार के बीच आखिरी बार 22 जनवरी को बातचीत हुई थी। उसमें भी किसान केवल जवाब देने गए थे कि उनको सरकार का प्रस्ताव मंजूर नहीं है। उसके बाद से आंदोलन में लगातार उतार चढ़ाव चल रहा है और इस समय आंदोलन सामान्य तरीके से चलाया जा रहा है।

इस बीच कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने पुराने प्रस्ताव पर बातचीत के लिए हमेशा तैयार रहने की बात कही तो किसान नेता भी जवाब देने के लिए तुरंत आगे आ गए। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने उनको पहले डेढ़ साल तक कानूनों को स्थगित करने के साथ ही कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया था और उस प्रस्ताव को वह एक महीने पहले नामंजूर कर चुके हैं। किसान नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार के केवल बयान से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनको बातचीत के लिए पहले की तरह प्रस्ताव देना होगा।
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सरकार केवल बयान देकर बातचीत के लिए तैयार रहने की बात करती है, बल्कि वह बातचीत करना चाहती तो किसानों को प्रस्ताव भेजकर पहले की तरह बुलाया जाता। इसलिए सरकार बातचीत करना चाहती है तो प्रस्ताव में कुछ नया किया जाए और उसको पहले की तरह भेजा जाए। सरकार बार-बार एक ही बात कहती है कि पुराने प्रस्ताव पर बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन जिस प्रस्ताव को एक महीने पहले ही नामंजूर कर चुके हैं उसपर किस तरह से बातचीत की जाएगी।

सरकार को बातचीत करनी है तो उससे आगे का प्रस्ताव भेजे और वह भी पहले की तरह भेजा जाए। उसके बाद ही उस पर बातचीत करेंगे। यह जरूर है कि सरकार अब मानने लगी कि किसानों की काफी भीड़ है और इसलिए ही खुद कहते है कि भीड़ एकत्र करने से कानून नहीं बदले जाते। जबकि पहले सरकार ही कहती थी कि चंद किसान ही विरोध कर रहे हैं, लेकिन अब वह मान रहे है कि विरोध करने वालों की बड़ी भीड़ है।

जगजीत सिंह दल्लेवाल, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा
सरकार सही में बात करना चाहती है तो वह अपनी जिद को छोड़े और पुराने प्रस्ताव को बदलकर भेजे। सरकार अगर कुछ नया प्रस्ताव भेजती है तो किसान संगठन बातचीत जरूर करेंगे। इस तरह की बात करके यह दिखाया जाता है कि वह बातचीत के लिए तैयार है और किसान संगठन बातचीत नहीं करना चाहते है। जबकि इसके विपरीत सबकुछ हो रहा है और इसलिए अब अगर बातचीत होती है तो अंदर क्या-क्या होता है, वह जनता के सामने आना चाहिए। जिससे किसान संगठनों व सरकार की सच्चाई सभी को पता चल सके।
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शमशेर सिंह दहिया, महासचिव भाकियू अंबावता

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