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सरकार से लिखित प्रस्ताव चाहते हैं किसान, तभी शुरू हो सकेगी बातचीत, अपनी तरफ से नहीं करेंगे पहल

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सरकार व किसानों के बीच बातचीत का रास्ता दोबारा से खुलता दिख रहा है, लेकिन वह एक-दूसरे की पहल का इंतजार कर रहे है। पीएम नरेंद्र मोदी ने आखिरी बैठक का प्रस्ताव अभी खत्म नहीं होने की बात कही तो किसान नेता उससे संतुष्ट नजर आए कि पहली बार पीएम ने किसानों के बारे में कुछ सकारात्मक रुख दिखाया है। किसान चाहते हैं कि सरकार से लिखित प्रस्ताव आता है, तभी बातचीत शुरू हो सकेगी और किसान अपनी तरफ से पहल नहीं करेंगे। इस तरह अब किसानों को सरकार के लिखित प्रस्ताव का इंतजार है, जिससे बातचीत का बंद पड़ा रास्ता दोबारा से खुल सके और उससे कोई समाधान निकल सके। इसके साथ ही किसान नेताओं ने यह भी चेताया है कि सरकार अगर समझ रही है कि वह आंदोलन को तोड़कर खत्म करा देगी तो यह उसकी बड़ी भूल है और ऐसा कभी नहीं होगा।
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कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों व सरकार के बीच आखिरी बार 22 जनवरी को बातचीत हुई है और उसमें भी किसान केवल जवाब देने गए थे कि उनको सरकार का प्रस्ताव मंजूर नहीं है। उसके बाद से आंदोलन में लगातार उतार चढ़ाव चल रहा है और अब दोबारा से आंदोलन मजबूत हो गया है। जिससे किसान व सरकार दोनों ही चाहते है कि एक बार फिर बातचीत का सिलसिला शुरू हो। इस बीच ही पीएम नरेंद्र मोदी के सरकार का प्रस्ताव अभी खत्म नहीं होने की बात कही तो इसे किसानों व सरकार के बीच चल रहा गतिरोध खत्म करने में काफी अहम माना जा रहा है। क्योंकि पीएम के पहली बार इस तरह की पहल शुरू की तो किसान नेताओं की तल्खी भी कुछ कम हुई है। किसान इसे काफी बेहतर मानते है, लेकिन वह यह भी चाहते हैं कि सरकार की तरफ से उनको लिखित प्रस्ताव भेजा जाए। उसके बाद ही वह बातचीत के लिए जाएंगे। क्योंकि वह पहले ही साफ कर चुके है कि उनकी तरफ से हमेशा बातचीत के रास्ते खुले हुए है। वह सरकार के किसी भी प्रस्ताव को नजर अंदाज नहीं करेंगे। किसान नेताओं का मानना है कि किसी भी मामले में बातचीत के बाद ही कोई हल निकल सकता है। अब जिस तरह से सरकार व किसान नेता दोनों का रुख नरम दिख रहा है, उससे बातचीत का सिलसिला भी दोबारा शुरू होने की पूरी उम्मीद लग रही है। केवल दोनों ही एक-दूसरे की पहल का इंतजार कर रहे है, लेकिन यह उम्मीद जताई जा रही है कि इसमें सरकार की ओर से जल्द पहल हो सकती है।
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किसानों को आंदोलन करते हुए दो महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। अब पीएम नरेंद्र मोदी ने इसपर कोई बात कही है तो यह अच्छी बात है कि उन्होंने अन्नदाता की बात को सुना है। किसानों के लिए तभी अच्छा होगा, जब उनकी मांग को पीएम पूरा कराएंगे। इसका हल तभी होगा, जब केवल कहने की जगह सरकार इसपर बातचीत करके आगे बढ़े।
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सतनाम सिंह, महासचिव, भाकियू दोआबा
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पीएम ने पहली बार इस तरह किसानों के बारे में बात करके एक पहल की है, जिसकी हम तारीफ करते है। अब सरकार को बड़ा दिल करके किसानों की मांग को पूरा करना चाहिए। सरकार को आगे आना चाहिए और किसानों के साथ बातचीत करके जल्द से जल्द कृषि कानूनों को रद्द करने का फैसला लेना चाहिए। सरकार ने जिस तरह से इंटरनेट बंद किया है, वह अपनी नाकामी को छुपाने के साथ ही आंदोलन का तोड़ना चाहती है। सरकार को आंदोलन तोडने से ज्यादा समस्या के समाधान पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आंदोलन तभी खत्म होगा।
बूटा सिंह, शादीपुर, प्रधान भारतीय किसान मंच एकता
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पीएम नरेंद्र मोदी ने केवल मौखिक तौर पर प्रस्ताव की बात कही है। लेकिन अभी तक सरकार की ओर से लिखित प्रस्ताव कोई नहीं आया है। अगर सरकार का लिखित प्रस्ताव आता है तो किसान बातचीत के लिए जरूर जाएंगे। उससे पहले सरकार को किसानों का उत्पीडन बंद करना पड़ेगा। उसके बाद ही अच्छा होगा कि सरकार किसी तरह की बातचीत करे।
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सुखविंदर सिंह शेरगिल, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा
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