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कोरोना के बीच अस्पताल में पांच माह से निस्वार्थ सेवा में जुटा प्रोफेसर, नई तकनीक की 65 मशीनें बनाकर कर चुके दान

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अस्पताल में बनाकर लगाए गए अल्ट्रावायलेट टावर के साथ प्रोफेसर जोगेंद्र सिंह - फोटो : Sonipat
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अंकित चौहान
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सोनीपत। कोरोना के दौर में कई लोग नि:स्वार्थ भाव से लगातार दूसरों की सेवा में लगे हुए है। उसमें भी जहां अस्पताल में कोरोना की जांच होती हो और कोरोना के मरीजों का उपचार किया जाता है, वहां लगातार पांच महीने से निस्वार्थ सेवा करे तो वह बड़ी बात है। ऐसे ही सोनीपत के रहने वाले प्रोफेसर जोगेंद्र सिंह हैं, जिन्होंने कोरोना का दौर शुरू होते ही कुछ अलग करने का जज्बा दिखाया। वह दिन में अस्पताल में काम करते हैं तो वहां से जाने के बाद अपने घर व लैब में कोरोना वायरस से बचाव के लिए मशीनें बनाते हैं। प्रोफेसर जोगेंद्र सिंह अभी तक लगभग 65 मशीनें बनाकर दान कर चुके हैं, जिनको अस्पताल व अन्य ऐसी जगहों पर लगाया गया है, जहां उनके सहारे कोरोना से बचाव किया जा सके।
सोनीपत के मयूर विहार में रहने वाले इंजीनियर जोगेंद्र सिंह एक निजी कालेज में प्रोफेसर हैं। जब देश में कोरोना के केस आए तो प्रोफेसर जोगेंद्र सिंह को लगा कि देश के लिए उनको भी कुछ करना चाहिए। यह सोचकर ही प्रोफेसर जोगेंद्र सिंह ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई का इस्तेमाल किया और ऐसा सैनिटाइज टनल बनाया, जिसमें खर्च भी कम आता है तो उसमें इस्तेमाल होने वाले रसायन से शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रोफेसर जोगेंद्र सिंह ने एक टनल बनाई और उसके सकारात्मक परिणाम देखकर 20 टनल बनाई, जिनको दान देकर अस्पताल समेत अन्य ऐसी ही सार्वजनिक जगहों पर लगाया। जिससे आम लोग उनका इस्तेमाल कर सके। इनके अलावा भी वह कई मशीनें बना चुके हैं और वह लगभग 65 मशीनों को दान कर चुके हैं। प्रोफेसर जोगेंद्र बताते है कि वह राकेश अग्रवाल व हरिप्रकाश मंगला को अपना गुरु मानते है और उनकी व सेवानिवृत्त शिक्षक पिता अर्जुन सिंह की प्रेरणा से सेवा में जुटे हुए है। अस्पताल में पांच महीने से निस्वार्थ सेवा कर रहे
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प्रोफेसर जोगेंद्र सिंह को लगा कि वह कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए मशीनों को कुछ घंटे का समय निकालकर भी बना सकते है और इसके लिए वह घर व कालेज की लैब में सुबह या शाम को काम कर सकते है। इसलिए ही प्रोफेसर जोगेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बातचीत की और निस्वार्थ सेवा करने के लिए अस्पताल में काम शुरू कर दिया। यह उस समय हुआ, जब लोग अस्पताल तक जाने से हिचकते थे। वहां कोरोना संदिग्धों व मरीजों के बीच भी प्रोफेसर जोगेंद्र सिंह ने पीपीई किट पहनकर काम किया। जहां कोरोना संदिग्धों के सैंपल लिए जाते थे, वहां भी काम किया और वह इस समय भी कालेज के बाद लगातार काम कर रहे है।
डॉक्टरों के लिए अल्ट्रावायलेट चैंबर व अल्ट्रावायलेट टावर बना दिया
प्रोफेसर जोगेंद्र सिंह जहां दिन में अस्पताल में सेवा करते रहे, वहीं घर व लैब में जाकर कोरोना से बचाव के लिए मशीनें बनाते रहे। प्रोफेसर जोगेंद्र ने डॉक्टरों के स्वास्थ्य उपकरण, चश्मे आदि को सैनिटाइज करने को अल्ट्रावायलेट चैंबर बनाया और उसको फ्री में अस्पताल में लगा दिया। इसके अलावा कोरोना वार्ड में ड्यूटी के दौरान पहने जाने वाली किट को नष्ट करने के लिए बर्नर बनाया, जिसका धुआं ऊपर नहीं जाता था और वह मशीन में पानी के साथ नीचे रह जाता था। वहीं अब प्रोफेसर जोगेंद्र ने अल्ट्रवायलेट टावर बनाया है, जिससे किसी भी लगभग 250 वर्ग फुट के कमरे को 30 मिनट में वायरस मुक्त किया जा सकता है। यह भी अस्पताल में लगवा दिया गया है।
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कोरोना से डरे बिना सेवा में जुटे है प्रोफेसर: पीएमओ
अस्पताल के पीएमओ डॉ. आदर्श शर्मा ने बताया कि ऐसा भी समय था, जब कोरोना से लोग काफी डर रहे थे। लेकिन प्रोफेसर जोगेंद्र सिंह ने अस्पताल में आकर सेवा करनी शुरू की और वह स्टाफ का काम में हाथ बंटाते थे। पीपीई किट पहनकर काम करते थे और उन्होंने देखा कि मशीनों के सहारे वह किसा तरह से कोरोना पर काबू पाने में मदद कर सकते है तो उसी आधार पर काफी मशीनें बनाकर लगवाई। वह अभी तक भी कालेज के बाद अस्पताल में निस्वार्थ काम करने आते है।
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