गोहाना। गांव खानपुर कलां स्थित भगत फूलसिंह महिला विश्वविद्यालय की कर्मचारी संघर्ष समिति (शिक्षक एवं गैर-शिक्षक) ने कर्मचारियों के वेतन की मांग को लेकर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर चौथे दिन भी धरना दिया।
धरने की अध्यक्षता करती हुईं समिति की सचिव प्रो. डॉ. सुमन ने कहा कि कर्मचारियों को जुलाई का वेतन जारी कर दिया गया है लेकिन उनको बाकी के तीन महीने का नहीं दिया गया है। कर्मचारी संघर्ष समिति इसे लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा को पत्र लिखा है।
समिति की सचिव ने बताया कि अगस्त से अक्तूबर तक का वेतन नहीं मिलने के कारण विश्वविद्यालय के स्कूल, शिक्षण विभागों, आयुर्वेद संस्थान व क्षेत्रीय केंद्रों में कार्यरत शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मचारी आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार आश्वासन दे रहा है कि सभी को जल्द वेतन मिल जाएगा लेकिन कोई भी आश्वासन आज तक फलीभूत नहीं हुआ है। कुलपति प्रो. सुदेश, कुलसचिव प्रो. शिवालिक यादव को कई बार अपील करने के बावजूद वेतन नहीं मिला है।
कर्मचारियों ने कहा कि सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की बात करती है लेकिन उत्तर भारत के एकमात्र महिला विश्वविद्यालय के कर्मचारी वेतन न मिलने की मार झेल रहे हैं।
बजट वेतन व विकास खर्चों के लिए अपर्याप्त
संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि विश्वविद्यालय में करीब 15,000 से अधिक छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं लेकिन 800 कर्मचारियों का वेतन लंबित है। इनमें 150 नियमित शिक्षक, 179 अनियमित शिक्षक, 422 नियमित गैर शिक्षक व 555 हरियाणा कौशल रोजगार निगम के कर्मचारी शामिल हैं। इस बार का बजट वेतन व विकास खर्चों के लिए अपर्याप्त है। 35 करोड़ के अनुपूरक बजट की मंजूरी के बावजूद कोष में पैसे नहीं हैं इसलिए वेतन मिल पाने की कोई खास उम्मीद नहीं लगाई जा सकती।
नियमित वेतन नहीं मिलने तक जारी रहेगा धरना
कर्मचारी संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि वेतन लंबित रहने के कारण कर्मचारी ऋण, बच्चों की स्कूल फीस, स्वास्थ्य बिल, घरेलू खर्च जैसे आवश्यक दायित्व पूरे नहीं कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल विश्वविद्यालय को पर्याप्त बजट आवंटित कर समाधान करवाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि संघर्ष समिति ने पहले 28 अक्तूबर को सांकेतिक विरोध जताकर वेतन संबंधी समस्या के समाधान की गुहार लगाई थी लेकिन समाधान नहीं होने पर 7 नवंबर से प्रतिदिन दोपहर 3 से 4 बजे तक धरना जारी रखने का निर्णय लिया है। जब तक उन्हें नियमित वेतन नहीं मिलेगा, उनका धरना जारी रहेगा।