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पेट के कीड़े मारने वाली दवा से तीन बच्चों की मौत

Wed, 03 Sep 2014 01:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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शहर की ऋषि कॉलोनी में पेट के कीड़े मारने वाली दवाई लेने के बाद एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौत हो गई। सगे भाइयों ने सामान्य अस्पताल में जबकि बड़ी बहन ने एक निजी अस्पताल में दम तोड़ा।
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देर शाम तक दवाई देने वाले मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल टीम गठित कर दवाई को जांच के लिए भिजवाने के अलावा मेडिकल स्टोर सील कर दिया।
 
जानकारी के अनुसार मूल रूप से हुगली पश्चिम बंगाल का रहने वाला भरत सिंह करीब 15 वर्षों से ऋषि कॉलोनी में रह रहा था। भरत सिंह ने रविवार शाम को सब्जी मंडी के पास स्थित कौशिक मेडिकल स्टोर से पेट के कीड़े मारने की दवाई एल्बेंडाजोल की दो शीशी खरीदी थी।
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मंगलवार सुबह सब्जी मंडी में पल्लेदारी करने वाला भरत काम पर आ गया। इस दौरान उसकी पत्नी बसंती ने करीब सात बजे बच्चों को दवाई पिलाई। दवा पिलाने के कुछ देर बाद 2 साल के अजय, 5 साल के सोनू और 8 साल की मुस्कान की तबीयत खराब होने लगी। तीनों बच्चों को करीब 9 बजे सामान्य अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल में पहुंचने पर डॉक्टरों ने अजय और सोनू को मृत घोषित कर दिया। वहीं मुस्कान को प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद जब मुस्कान की हालत बिगड़ने लगी तो उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर उपचार के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया।

दूसरी ओर सूचना मिलने के बाद पहुंची पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। देर शाम तक पुलिस ने मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। वहीं दवाई की शीशी को जांच के लिए भेज दिया गया। बच्चों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दिया गया। सामान्य अस्पताल में जांच के लिए डीएसपी दर्शन लाल मलिक और अजीत सिंह भी पहुंचे थे।

मेडिकल स्टोर किया सील
बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एक त्वरित टीम गठित की। यह टीम डिप्टी सीएमओ डा. सुखबीर सिंह के नेतृत्व में सीधे मेडिकल स्टोर पर पहुंची। यहां पर टीम ने कई दवाइयों के सैंपल लिए। इसके बाद विभागीय टीम ने त्वरित कार्रवाई कर मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया।

परिवार बेहाल
ऋषि कॉलोनी में मंगलवार को तीन बच्चों की मौत के बाद से मातम का माहौल बना हुआ है। सिर्फ भरत सिंह का परिवार ही नहीं बल्कि आसपास के लोगों में शोक है। भरत सिंह भी उस समय को कोस रहा है जब वह 70 रुपये में अपने तीनों बच्चों की मौत का सामान ले आया। रविवार शाम को सब्जीमंडी से निकलते समय भरत सिंह मेडिकल स्टोर पर पहुंचा।

 कई दिनों से उसकी पत्नी बसंती बता रही थी कि बच्चों के पेट में कीड़े हैं, इसीलिये इनके पेट में दिक्कत रहती है। मेडिकल स्टोर पर कहा कि पेट में कीड़े मारने वाले दवा दे दो। स्टोर पर मौजूद एक युवक ने एल्बेंडाजोल की दो शीशी दे दी, इसके साथ उसने एक दवाई और तथा एक रूई का पैकेट भी लिया।

 ये सारा सामान लेकर वो घर पहुंच गया। सोमवार को तो दवाई देनी याद नहीं रही, इसीलिये मंगलवार को सुबह स्कूल जाने से पहले ही दवाई दे दी। भरत सिंह की 8 साल की बेटी मुस्कान, 5 साल का बेटा सोनू दोनों ही सब्जी मंडी के पास ही स्थित हिंदू प्राइमरी स्कूल में पढ़ते थे।

तीनों बच्चों को खोने के बाद बेसुध बसंती का रो-रो कर बुरा हाल है, लेकिन उसकी जुबान पर सिर्फ एक की बात थी, दवाई गलत समय पर दे दी। दूसरी ओर भरत सिंह ने बताया कि मेडिकल स्टोर वाले ने कहा था कि दवाई सुबह खाली पेट देनी है।

जबकि डॉक्टर बता रहे हैं कि दवाई रात के समय खाना खाने के बाद देनी चाहिए थी। भरत सिंह ने बताया कि मंगलवार को सुबह वह सब्जी मंडी में आ गया था और काम पर लग गया था। घर पर उसकी पत्नी बसंती ने बच्चों को दवाई दी।

मेडिकल स्टोर के संचालक के कहे अनुसार अजय और सोनू को तो आधी-आधी शीशी और मुस्कान को पूरी शीशी दवाई की पिलानी थी। बसंती ने लगभग 7.30 बजे भरत को फोन कर बताया कि तीनों बच्चों की तबीयत खराब हो गई है। इसके बाद ही वे बच्चों को लेकर अस्पताल में पहुंचे।

डीएसपी के सामने उखड़ा भरत सिंह
पुलिस जब जांच कर रही थी तो डीएसपी दर्शन लाल मलिक भी सामान्य अस्पताल में पहुंचे थे। डीएसपी ने पीड़ित पिता भरत सिंह से पूछताछ करनी शुरू कर दी।

अभी पूछताछ चल ही रही थी कि अचानक से भरत सिंह उखड़ गया। डीएसपी के एक सवाल पर उसने कहा कि हमें क्या मालूम। इस पर एक बार तो स्थिति बिगड़ गई थी, लेकिन इसके बाद भरत सिंह को बिठा कर पानी पिलाया गया, इसके बाद जांच शुरू की गई।


दवा में मिला था सल्फास
एल्बेंडाजोल पीने के बाद तीन बच्चों की मौत के मामले में एक पेंच भी उभर कर सामने आया है। सिपला कंपनी की एल्बेंडाजोल की इन दोनों शीशियों में मौजूद दवाई का रंग अलग-अलग था।

एक शीशी जो कि पूरी खाली थी, उसमें दवाई का रंग हलका हरा था, जबकि दूसरी शीशी में दवाई का रंग सफेद था। खास बात ये है कि हरे रंग वाली दवाई की शीशी पूरी तरह से खाली थी, सिर्फ एक-दो बूंद ही थी शीशी में।

वहीं दूसरी शीशी में काफी दवाई बची हुई थी। चिकित्सकों की प्रारंभिक जांच में ये चीज सामने आई है। इस बारे में पुलिस टीम को भी बता दिया गया है। चिकित्सकों की मानें तो दवाई में सल्फास मिला हुआ था। चिकित्सकों ने अंदेशा जताया कि दवाई में कार्डियो टॉक्सिक था। इसीलिये तो तीनों बच्चों के सीधे हृदय पर असर पड़ा। तीनों ही बच्चों की मौत हार्ट के बंद होने से हुई है।

चिकित्सकों के अनुसार सीधे कार्डियो को निशाना बनाने वाली दवाई सल्फास होती है और बच्चों की मौत के लक्षण पूरी तरह से सल्फास के लग रहे हैं।

सल्फास के कारण मौत होने पर शव से बदबू आने लगती है, लेकिन इन तीनों बच्चों के शव से बदबू नहीं आ रही थी। पुलिस ने जब ये सवाल डॉक्टरों से पूछा तो डॉक्टरों ने बताया कि एल्बेंडाजोल ऐसा मिश्रण है जब इसमें सल्फास मिला देंगे तो सल्फास की बदबू पूरी तरह से खत्म हो जाती है।

कैसे मिला दवाई में सल्फास
चिकित्सकों ने बताया कि 70 प्रतिशत चांस ये ही है कि दवाई में सल्फास मिला हुआ था। इतने छोटे बच्चों के लिए तो वैसे भी 5 मिलीग्राम सल्फास भी बहुत होता है। अब ये दवाई में किसी ने मिलाया या फिर कंपनी से ही ऐसा सोल्यूशन आया, इसका फिलहाल पता नहीं लग रहा है।

हालांकि ऐसा जरूरी भी नहीं है कि दवाई में पक्का सल्फास ही मिला हुआ था। क्योंकि दवाई एक्सपायरी डेट की भी नहीं था। 2015 में एक्सपायरी होने वाली दवाई के बिना किसी मिलावट के इस तरह से टॉक्सिक होने के चांस बहुत ही कम हैं।
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