साइबर थाना पुलिस ने टास्क देकर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। साइबर थाना पुलिस ने मामले में आठ आरोपियों को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी सवाई माधोपुर व जोधपुर जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने सोनीपत के गांव जांटी कलां के युवक से 16.94 लाख रुपये की ठगी की थी। गिरोह इस तरह 1931 लोगों से 8.90 करोड़ की ठगी कर चुका है, जिसमें अलग-अलग 64 मुकदमे दर्ज हैं।
गांव जांटी कलां निवासी गौरव ने 11 अक्तूबर को साइबर थाना पुलिस को बताया था कि 30 सितंबर को उनके मोबाइल में इंस्टाग्राम आईडी पर एक लिंक आया था। इस पर क्लिक करने के बाद वह एक ग्रुप पर जुड़ गए थे। दूसरी तरफ से उन्हें एक टास्क से संबंधित मैसेज भेजा था। उनको फोटो लाइक करने का टास्क दिया गया था, जिसमें कमाई का लालच दिया था। ठगों ने पहले उनके खाते में 123 रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। उनसे 14 टास्क पूरे करवाकर 140 रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। इसके बाद 1 अक्तूबर को 1000 रुपये लेकर 1300 रुपये, फिर 3000 लेकर 3900 रुपये दिए गए थे। मुनाफे का लालच देकर उन्हें फंसा लिया गया। वह बातों में फंसाते रहे और उससे रुपये डलवाते रहे। उनसे 16,93, 976 रुपये हड़प लिए गए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था।
पुलिस टीम ने गहनता से जांच कर गिरोह पर कसा शिकंजा
मुकदमा दर्ज करने के बाद मामले में इंस्पेक्टर बसंत कुमार के साथ एएसआई नवदीप, नवीन, एचसी जितेंद्र की टीम ने जांच शुरू की। मामले में कड़ी से कड़ी जोड़कर अलग-अलग आठ आरोपी दबोचे गए, जिसमें पुलिस ने पहले राजस्थान के सवाई माधोपुर जिला के पिंटू व अजय को जयपुर से गिरफ्तार किया। इसके बाद जोधपुर के रहने वाले सचिन, रावलराम व यशराज को जयपुर से दबोचा गया। इसके बाद सवाई माधोपुर के हरिमोहन, राकेश व देशराज को काबू किया गया।
पुलिस ने खातों में फ्रिज कराए 7.98 लाख रुपये
मामले को लीड कर रही डीसीपी प्रबिना पी के निर्देशन में टीम ने आरोपियों के खाते में ही 7.98 लाख रुपये फ्रिज करा दिए। बाद में गिरफ्तारी कर उनसे 27 हजार रुपये, 5 मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड व एक चेक बुक बरामद की गई।
साइबर ठग ऐसे देते हैं वारदात को अंजाम
साइबर ठग वर्तमान में टास्क देकर, लिंक भेजकर, डिजिटल अरेस्ट करने के बाद भय दिखाकर, पार्ट टाइम नौकरी के नाम पर ठगी करते हैं, साथ ही मोबाइल फोन हैक कर, शेयर बाजार में ट्रेडिंग सिखाने के बहाने लोगों को झांसे में लेते हैं।
ठगों को अलग-अलग बांटा गया था काम
पुलिस का कहना है कि साइबर ठगों को अलग-अलग काम बांटा गया था। गिरफ्तार आरोपी अजय, रावलराम व सचिन का काम बैंक खाते उपलब्ध कराना था, जिसमें साइबर ठग लोगों के ठगी के रुपये डालते थे। इसके बाद उस राशि को निकालने का काम पिंटू का था। वह खातों से रुपये निकाल लेता था या उन्हें आगे किसी अन्य खाते में डाल देता था।
खाते उपलब्ध कराने व रुपये निकालकर देने का मिलता था हिस्सा
पुलिस जांच में सामने आया है कि रुपये निकालकर देने व खाते उपलब्ध कराने के बदले हिस्सा मिलता था। इस काम का गिरोह के सदस्यों को 10 फीसदी दिया जाता था। उस राशि को रखकर बाकी राशि अन्य साइबर ठगों को भेज दी जाती थी।
साइबर ठगी से बचने के लिए लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर आने वाले लिंक को खोलकर नहीं देखना चाहिए, साथ ही स्कीम के लालच में नहीं आना चाहिए। संदिग्ध नंबर से कॉल आती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या थाना में संपर्क करें।
- प्रबिना पी, डीसीपी ईस्ट सोनीपत।