शहर के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों में उस समय हलचल मच गई जब राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीआरटी) की डिप्टी डारयेक्टर सुमन नैन स्कूलों में दौरा करने पहुंच गई। सुमन नैन कार्यालयों में जाने की बजाय सीधा कक्षाओं में गई और बच्चों से सवाल-जवाब किए। छात्राएं न तो अंग्रेजी के शब्द देन और देम की स्पेलिंग बता पाईं और न ही यह बता सकी कि वह किस देश में रहती हैं। इससे नाराज डिप्टी डायरेक्टर ने न केवल अध्यापकों की क्लास ली, बल्कि हिदायत दी कि शिक्षा के स्तर को सुधारें। एक माह बाद फिर जांच करने आऊंगी।
बुधवार को एससीआरटी की डिप्टी डायरेक्टर सुमन नैन सबसे पहले पुराना बस स्टैंड स्थित राजकीय कन्या वरिष्ट माध्यमिक विद्यालय में दौरा किया। जहां उन्होंने कक्षाओं में जाकर छात्राओं से कई प्रश्न पूछे। कहीं जवाब मिला तो कहीं नहीं मिला। इसके बाद प्राइमरी स्कूल व पुरानी अनाज मंडी का कन्या स्कूल का हाल भी ऐसा ही रहा। स्कूलों के दौरे करने के बाद सुमन नैन ने नाराजगी जताई और अध्यापकों व बच्चों को सही शिक्षा में ध्यान देने के निर्देश दिए। इससे पहले डिप्टी डायरेक्टर ने मोहाना, बड़वासनी समेत कई गांवों के स्कूलों का दौरा किया।
छठी कक्षा की छात्राएं नहीं बता पाईं स्पैलिंग
डिप्टी डायरेक्टर सुमन नैन पुरानी अनाज मंडी स्थित राजकीय कन्या वरिष्ट माध्यमिक विद्यालय में पहुंचते ही छठी कक्षा में पहुंच गई और छात्राओं से सवाल जवाब करने लगी। उन्होंने छात्राओं से अंग्रेजी में देन और देम की स्पैलिंग की पूछी तो एक भी छात्रा इसका जवाब नहीं दे सकी। इसके अलावा जब उन्होंने पूछा कि हम किस देश में रहते हैं तो एकेभी छात्रा को यह पता नहीं था। जिसे देख वह आश्चर्यजनक रह गई। इसके बाद ग्यारहवीं व बारहवीं की कक्षाओं का भी उन्होंने दौरा किया। यहां भी हालत बहुत अच्छी नहीं दिखी।
बॉयोमैट्रिक मशीन पर उठाए सवाल
सुमन नैन ने स्कूलों में लगने वाली बॉयोमैट्रिक मशीन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बॉयोमैट्रिक मशीन पूरी तरह से हाजिरी लगाने में सफल नहीं है। यह कभी खराब हो जाती है तो कभी ठीक रहती है। इससे अध्यापकों के रूटीन पर तो असर पड़ा है। इसमें सुधार लाने की आवश्यकता है।
कन्या स्कूल की ऊंची उठेगी दीवार
डिप्टी डायरेक्टर के दौरे के समय उपमंडल के बीईओ सुभाष भारद्वाज ने भी स्कूलों का दौरा किया। उन्होंने पुरानी अनाज मंडी स्थित राजकीय कन्या स्कूल की दीवार देखी तो वह दीवार बहुत ही नीचे थी। स्कूल की बिल्डिंग तीन मंजिला है। इससे किसी भी छात्रा के नीचे गिरने का भय रहता है। इसीलिए बीईओ ने स्कूल प्रशासन को जल्द स्कूल की दीवार को ऊंचा उठाने के लिए एस्टिमेट मांगा है और जल्द इसे पूरा करने के आदेश भी किए हैं।
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क्या बोलीं डिप्टी डायरेक्टर
स्कूलों का एडमिनिस्ट्रेशन लेवल तो अच्छा मिला, लेकिन लर्निंग एवं विषय संबंधी ज्ञान बिल्कुल नीचे मिला। वह ऐसे स्कूलों को 100 में से 10 नंबर ही देंगी। क्योंकि इन स्कूलों की कक्षाओं को यह तक नहीं पता कि वह किस देश में रहती है। इससे बदतर बात और क्या हो सकती है। स्कूलों की इस दिशा पर सभी स्कूल प्रशासनिक अधिकारियों को इस दशा सुधारने का आदेश दिया है। एक महीने बाद फिर स्कूलों का दौरा किया जाएगा। अगर यही हालात रहे तो अध्यापकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
-सुमन नैन, डिप्टी डायरेक्टर, एससीआरटी