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भूकंप की आपदा में प्रबंधन रामभरोसे

Tue, 27 Oct 2015 11:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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शहर के लोगों पर खतरे का साया मंडरा रहा है। बदकिस्मती से अगर जोरदार भूकंप आ गया तो शहर की वह कमजोर इमारतें भरभराकर गिर जाएंगी, जो जर्जर हो चुकी हैं। खास बात यह है कि नगर निगम के पास ऐसी इमारतों का न तो कोई रिकॉर्ड है और ऐसी मुसीबत आने पर आपदा प्रबंधन के पास न तो उपकरण हैं। रही बात सिविल डिफेंस की तो उसे भी आम लोगों को जागरूक किए छह महीने से अधिक का समय हो चुका है। सरकारी लापरवाही यहीं नहीं थमती है। जिस भवन में नगर निगम का दफ्तर चल रहा है, उसे भी कंडम घोषित किया जा चुका है। ऐसे हालात में भूकंप के समय शहर की स्थिति क्या होगी, यह तो समय ही बताएगा। गौरतलब है कि एक दिन पहले पूरे उत्तर भारत के साथ पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भूकंप आया। उस समय सोनीपत की धरती भी हिल उठी थी। भूकंप का केंद्र दूर होने से जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन आगे भी ऐसा ही होगा, यह कहां नहीं जा सकता। ऐसे में शासन-प्रशासन को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि अमर उजाला ने जब प्रशासन की तैयारियों को खंगाला तो वहां सजगता के नाम पर कुछ नहीं मिला।  
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पूरे हरियाणा को तीन जोन में है बांटा गया
नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान की सरकारी वेबसाइट की बात मानें तो हरियाणा में सोनीपत ऐसा जिला है जो हाई डैमेज रिस्क जोन में आता है। पूरे हरियाणा को तीन जोन में बांटा गया है। बाकायदा नक्शे में दर्शाया गया है कि सोनीपत एमएसके 8 के तहत जोन-4 में सोनीपत जिला है। हालांकि सोनीपत का कुछ क्षेत्र जोन 3 में आता है। जोकि मध्यम डैमेज रिस्क जोन है।
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कोट मोहल्ला, हलवाई हट्टा और सर्राफा बाजार में हैं जर्जर इमारतें
शहर में कई जगहों पर जर्जर इमारतें हैं। इनमें से अधिकतर में से तो कभी भी ईंटें या मलबा टूटकर गिरता रहता है। हालांकि कुछ जगहों पर जर्जर इमारतों को दुुरुस्त कर दिया गया है, इसके बावजूद अधिकतर इमारतें अभी भी सालों पुरानी स्थिति में हैं। विशेष तौर पर कोट मोहल्ला, हलवाई हट्टा, सर्राफा बाजार में कई ऐसी इमारतें हैं जो कभी भी अपने वजूद खोने के साथ-साथ किसी की जान भी ले सकती हैं। वहीं शहर में जर्जर इमारतों के संदर्भ में नगर निगम के पास आंकड़ों की बात करें तो निगम के अधिकारियों को भी पता नहीं है कि शहर में कहां-कहां इमारतें कंडम हैं। निगम बने भी चार महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक इस तरह की जानकारी अधिकारियों के पास न होना उदासीनता को दर्शाती है।
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पाठशाला और डिस्पेंसरी भी कंडम
जिस इमारत में नगर निगम का कार्यालय है, वो भी कंडम बिल्डिंग घोषित की जा चुकी है। इसके बावजूद कर्मचारियों और प्रतिदिन आने वाले सैकड़ों लोगों की जिंदगी दांव पर लगाकर काम किया जा रहा है। इसी तरह से 8 मरला गुरुद्वारे के सामने स्थित ईएसआई डिस्पेंसरी भी खस्ताहाल हो चुकी है। जगह-जगह दरारों से मरीज भी यहां आने से कतराते हैं। दूसरी ओर सिक्का कॉलोनी स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला की इमारत भी पूरी तरह से कंडम है। पाठशाला के एक कमरे में तो हाल ही में छत गिर गई थी।
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आपदा प्रबंधन के पास उपकरण के नाम पर सिर्फ फायर सूट
भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से लड़ने के लिए आपदा प्रबंधन के पास भी कोई उपकरण नहीं है। उपकरण के नाम पर फायर सूट का नाम लिया जाता है। दूसरी ओर सिविल डिफेंस जिसका काम आपदा के समय लोगों को अपनी जिंदगी बचाने के तरीके सिखाने होते हैं। उसकी तरफ से पिछली ड्रिल अप्रैल में नेपाल में आए भूकंप के कुछ दिन बाद की गई थी। उसके बाद से कागजों में तो एक-आध शिविर लगाए गए हैं, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं है।
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सिविल डिफेंस की ओर से कई बार ड्रिल और शिविर का आयोजन किया जाता है। कई तरह के उपकरण भी हमारे पास हैं। आपदा भवन में उपकरणों को रखवाया गया है। कुछ समय पहले ही उपकरण मंगवाए गए थे।
-सुधांशु गौतम, सीटीएम, सोनीपत
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जर्जर इमारतों के संदर्भ में अभी तक कोई जानकारी नहीं है, न ही कोई सूची है। इसके लिए सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के उपरांत ही इस बारे में जानकारी दी जा सकती है। वैसे भी इमारत को कंडम घोषित करना प्रशासन का काम है।
-ठाकुर लाल शर्मा, एक्सईएन, नगर निगम, सोनीपत
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क्यों आता है भूकंप
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट हैं जो लगातार घूम रही हैं। जब यह प्लेट ज्यादा टकराती हैं तो वह जोन फाल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट टूटने लगती है। नीचे की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है। इसी जद्दोजहद में भूखंड में कंपन पैदा होता है। यही कंपन सतह तक पहुंचता है। जिसे भूकंप कहा जाता है।
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कितनी तबाही लाता है भूकंप
रिक्टर स्केल        असर
0 से 1.9        सिर्फ सिस्मोग्राफ से ही पता चलता है।
2 से 2.9        हल्का कंपन।
3 से 3.9        कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर।
4 से 4.9        खिड़कियां टूट सकती हैं। दीवारों पर टंगी फ्रेम गिर सकती हैं।
5 से 5.9        फर्नीचर हिल सकता है।
6 से 6.9       इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो
            सकता है।
7 से 7.9    इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं।
8 से 8.9    इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं। सुनामी का खतरा।
9 और उससे ज्यादा पूरी तबाही। कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी। समंदर नजदीक हो तो सुनामी।
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