फोटो 35- सोनीपत नरेंद्र नगर स्थित शिव मंदिर से आचार्य मनमोहन मिश्रा।
सोनीपत। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 12 अक्तूबर शनिवार को बुराई पर अच्छाई का प्रतीक दशहरा पर्व मनाया जाएगा। इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने रावण तो जगत जननी मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। दशहरा पर्व के दिन भगवान श्रीराम की विशेष पूजा की जाती है।
नरेंद्र नगर स्थित शिव मंदिर से आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि दशहरा पर श्रवण नक्षत्र व रवि के मंगलकारी योग का निर्माण हो रहा है। दशहरा पर्व को विजय दशमी के नाम से भी जाना जाता है। विजयादशमी का पर्व मानसून ऋतु की समाप्ति और शरद के प्रारंभ का सूचक है। यह दिन नया व्यापार व विजय यात्राओं के प्रारंभ करने के लिए शुभ रहेगा। इस दिन रावण वध व दुर्गा पूजन दोनों पर्व एक साथ मनाए जाते हैं। दशहरे का पूरा दिन शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त माना गया है।
इस दिन बिना मुहूर्त के कोई भी नया कार्य प्रारंभ किया जा सकता है। इसके अलावा सोना, चांदी व वाहन खरीदारी करना भी काफी शुभ रहेगा।
शस्त्रों, पेड़ व वाहन पूजा का विशेष महत्व
इस दिन व्यक्ति अपने पूर्वजों से चली आ रही शस्त्र पूजन की परंपरा को निभाते हैं। साधना व सिद्धियों के लिए भी इस दिन का प्रयोग किया जाता है। वाहन पूजन करना भी काफी शुभ मनाया गया है। दशहरा के दिन युवाओं व बच्चों का प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना शुभ रहेगा। इस दिन शमी के पेड़ की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है। माना जाता है कि महाभारत काल के दौरान पांडु पुत्रों ने अज्ञात वास में छिपने से पहले इस दिन शमी के पेड़ में अपने अस्त्र-शस्त्र छिपाकर उनकी पूजा की थी। इसके बाद वह स्वयं एक वर्ष विराट देश में छिपकर रहे थे, तभी उन्हें अपने लक्ष्य की प्राप्ति हुई थी।
यह रहेगा शुभ मुहूर्त
शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 12 अक्तूबर सुबह 10:57 बजे प्रारंभ होगी, जो अगले दिन 13 अक्तूबर को सुबह 9:07 बजे तक रहेगी। रावण दहन प्रदोष काल अर्थात सूर्यास्त से कुछ समय पहले किया जा सकता है। वहीं शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:16 से 3:35 बजे तक रहेगा। इस कार्यकाल में पूजा करना विशेष फलदायी रहेगा।