डॉ. सुशीला शर्मा।
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कड़ी मेहनत के बलबूते अगर इंसान किसी कार्य को करने की ठान ले तो फिर मंजिल नजदीक आती चली जाती है। सहायक प्रोफेसर डॉ. सुशीला शर्मा ने इसे कर दिखाया है। शादी के 10 साल बाद दिल्ली के विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में सहायक प्रोफेसर के पद पर रहते हुए डॉ. सुशीला ने न्यायिक सेवा परीक्षा को उत्तीर्ण कर अपना व परिवार का सपना पूरा कर लिया है।
मूलरूप से जींद के गांव गतौली के पूर्व सरपंच ऋषिराम भारद्वाज की बेटी डॉ. सुशीला शर्मा की शादी वर्ष 2012 में सोनीपत जिले के गन्नौर कस्बे के शास्त्री नगर निवासी विकास शर्मा के साथ हुई थी। वह सोनीपत सिविल अस्पताल में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। उनके दो बच्चे अंश व आरूही हैं।
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शादी के बाद परिवार की जिम्मदारियों को संभालने के साथ ही डॉ. सुशीला दिल्ली के विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में सहायक प्रोफेसर के रूप में सेवा दे रही हैं। इन सबके बावजूद उन्होंने अपने जज बनने के सपने को पूरा करने के लिए अपनी पढ़ाई जारी रखी। डॉ. सुशीला ने बताया कि कोरोना काल के समय उन्हें पढ़ाई करने का भरपूर मौका मिला।
उन्होंने घर पर ही ऑनलाइन पढ़ाई की और वर्ष 2021 में एचसीएस न्यायिक सेवा भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन किया। अब डॉ. सुशीला ने परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने पैतृक गांव के साथ अपनी ससुराल गन्नौर का नाम भी रोशन किया है। डॉ. सुशीला शर्मा ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से एलएलबी, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र से एलएलएम व भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। डॉ. सुशीला शर्मा ने अपने माता-पिता के साथ ही अपने ससुर सियाराम शर्मा, सास रामरति देवी व पति विकास शर्मा को कामयाबी का श्रेय दिया।