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Sonipat News: एआई की चुनाैतियों व न्याय पर चर्चा

Sun, 30 Nov 2025 01:46 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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फोटो 17- सोनीपत के डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में मंच पर - फोटो : samvad
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सोनीपत। डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के संघर्ष प्रबंधन एवं विवाद समाधान केंद्र (सीसीएमडीआर) की ओर से कानूनी व्यवहार में एआई : नवाचार, चुनौतियां एवं न्याय का भविष्य और एआई कानून पर सेमिनार हुआ। इसमें एआई की चुनाैतियों व न्याय पर चर्चा की गई।
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इसमें मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के सदस्य एवं दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश डॉ. सुधीर कुमार जैन ने शिरकत की। सेमिनार में विशेष अतिथि के रूप में जर्मनी से एआई विशेषज्ञ प्रदीप बमाल ने शिरकत की।
कुलपति प्रो. डॉ. देविंद्र सिंह ने सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए आधुनिक न्यायिक चुनौतियों, न्यायप्रणाली में प्रौद्योगिकी के प्रभाव, मानवीय मूल्यों की अनिवार्यता पर विस्तृत विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि एआई न्यायिक प्रक्रियाओं को तीव्र गति दे सकता है लेकिन न्याय का मानवीय चेहरा सदैव सर्वोपरि रहेगा।
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मुख्य अतिथि डॉ. सुधीर कुमार जैन ने भारतीय न्यायप्रणाली की वैश्विक प्रतिष्ठा, सामाजिक विवादों की बढ़ती जटिलता, न्यायिक विलंब की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) विशेषकर मध्यस्थता, आधुनिक न्याय व्यवस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग बन चुका है। देश में मध्यस्थता के माध्यम से हजारों मामलों का सफल निस्तारण हुआ है, जिससे विवादों के रचनात्मक समाधान की नई संस्कृति विकसित हुई है।
विशेष अतिथि प्रदीप बमाल ने एआई की विकसित होती तकनीक, व्यावसायिक अवसरों, चुनौतियों पर जानकारी दी। बताया कि एआई कानूनी अनुसंधान, अनुबंध प्रबंधन, केस विश्लेषण, प्रो-बोनो सेवाओं में अभूतपूर्व संभावनाएं उत्पन्न कर रहा है। एआई आधारित गलत उद्धरण (हलुसिनेशन), डेटा बायस, गोपनीयता जोखिम, यूएस-केंद्रित डेटा मॉडल जैसी चुनौतियों के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
बताया कि एआई का अनियंत्रित उपयोग रचनात्मक क्षमता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए स्वावलंबी विश्लेषणात्मक सोच विकसित करना अनिवार्य है। वर्ष 2030 के एआई विजन पर कहा कि भविष्य में एआई सह-वकील के रूप में वकीलों की दक्षता को बढ़ाएगा, न कि उन्हें प्रतिस्थापित करेगा।
कुलसचिव प्रो. डॉ. आशुतोष मिश्रा ने बताया कि एआई न्यायिक प्रक्रियाओं में दक्षता, पारदर्शिता, सुलभता के नए मानक स्थापित कर रहा है। कानूनी शिक्षा का उद्देश्य केवल विधि का ज्ञान प्रदान करना नहीं बल्कि छात्रों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करना भी है।

फोटो 17- सोनीपत के डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में मंच पर - फोटो : samvad

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